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अब श्री राम जन्मभूमि परिसर में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा लगाने की उठी मांग

ByAdmin Office

Jan 20, 2024

 

*अयोध्या :* भगवान चित्रगुप्त यमराज के सहायक हैं और मनुष्यों के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं। ये कायस्थ समाज के आराध्य देवता भी हैं। वैसे तो हमारे देश में भगवान चित्रगुप्त के अनेक मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ बहुत प्राचीन हैं। ऐसा ही एक मंदिर उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में भी है। मान्यता है इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान विष्णु ने की थी।
इसलिए कहते हैं श्रीधर्महरि चित्रगुप्त मंदिर।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वंय भगवान विष्णु ने इस मंदिर की स्थापना की थी और धर्मराज को दिये गए वरदान के फलस्वरुप ही धर्मराज के साथ इनका नाम जोड़कर इस मंदिर को श्रीधर्म-हरि मंदिर का नाम दिया है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि विवाह के बाद जनकपुर से वापिस आने पर श्रीराम-सीता ने सबसे पहले धर्महरिजी के ही दर्शन किये थे। साथ ही यहां ये भी माना जाता है कि अयोध्या आने वाले सभी तीर्थयात्रियों को श्रीधर्महरिजी के दर्शन जरूर करना चाहिये वरना उन्हें इस तीर्थ यात्रा का पुण्यफल प्राप्त नहीं होता।
*जब भगवान श्रीराम से नाराज़ हो गए भगवान चित्रगुप्त*
एक कथा के अनुसार, जब भगवान् राम की राजतिलक होने जा रहा था, तो सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया। राजतिलक समारोह में सभी देवता आए लेकिन चित्रगुप्त नहीं दिखे तो श्रीराम ने इसका कारण पूछा। पता चला कि गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने चित्रगुप्त महाराज को आमंत्रित ही नहीं किया। नाराज चित्रगुप्त ने स्वर्ग-नरक के सभी काम रोक दिए, जिससे संसार में अव्यवस्था फैल गई। तब गुरु वशिष्ठ ने एन एफ । भगवान श्रीराम से अयोध्या में सरयू नदी के किनारे स्थित चित्रगुप्त मंदिर में पूजा करने को कहा और बताया कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान विष्णु ने की है। भगवान श्रीराम के द्वारा पूजा करने पर चित्रगुप्त महाराज दोबारा अपने कार्य करने लगे। मान्यता ये भी है कि अयोध्या आकर यदि भगवान चित्रगुप्त के दर्शन न किए जाएं तो तीर्थ यात्रा का पूरा फल नहीं मिल पाता।
*श्री राम जन्मभूमि परिसर में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा लगाने की उठी मांग*
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भगवान चित्रगप्त जी की प्रतिमा लगाने की मांग उठने लगी है। पौराणिक तथ्यों के आधार पर अयोध्या कायस्थ विकास संस्थान ने श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को अपना मांग पत्र सौपा है। इस मौके पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि संगठन की मांग पर पूरा विचार किया जाएगा।
*ट्रस्ट महासचिव चम्पा राय ने संगठन के इस मांग की सराहना की*
संगठन ने दावा किया है कि जब भगवान राम दशानन रावण को मार कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राजसिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत थे। भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान राम के राज्यतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को सन्देश भेजने की व्यवस्था करने को कहा। गुरु वशिष्ठ ने ये काम अपने शिष्यों को सौंप कर राज्यतिलक की तैयारी शुरू कर दी। ऐसे में जब राज्यतिलक में सभी देवी-देवता आ गए तब भगवान राम ने अपने अनुज भरत से पूछा चित्रगुप्त जी नहीं दिखाई दे रहे है, इस पर जब उनकी खोज हई। खोज में जब चित्रगुप्त जी नहीं मिले तो पता लगा कि गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त जी को निमंत्रण पहुंचाया ही नहीं था। संगठन के
अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति लगने से ही पूर्णता प्राप्त होगी। मांग पत्र सौंपने वालों में प्रतीक श्रीवास्तव, अभय श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, जय प्रकाश श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव राजू सीएम श्रीवास्तव, राजीव श्रीवास्तव एडवोकेट, दीपक जौहरी, दीपक श्रीवास्तव, शिखर श्रीवास्तव, ऋभ श्रीवास्तव, निर्मल श्रीवास्तव, समेत बड़ी
संख्या में लोग मौजूद रहे।


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