
खालसा होटल गोविंदपुर के मालिक सरदार गुरुचरण सिंह ऊर्फ शेरा सिंह का अभी अभी चुपचाप अर्ध रात्रि को ट्रेन पकड़कर धनबाद छोड़ देना कोई अकस्मात घटनाक्रम नहीं था वरण इसका बीजारोपण तो उसी दिन हो गया था जिस दिन खालसा होटल पर बम विस्फोट हुआ और रंगदारी की मांग शेरा सिंह से हुआ था। परंतु आज जब चुपचाप वगैर किसी धनबाद वासी से शिकवा शिकायत के शेरा सिंह सपरिवार पंजाब चले गये तो एक यक्ष प्रश्न वे धनबाद जिला के राजनैतिक एवं प्रबुद्ध समाज के समक्ष छोड़ गये कि काश हम सबों ने अपनी भूमिका का र्निवहन किया होता और शेरा सिंह को मजबूत नैतिक सर्मथन दिया होता तो एक व्यवहार कुशल मृदुभाषी होटल वयवसायी का पलायन धनबाद से नहीं होता। उक्त उद्गार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सरदार शेरा सिंह के मित्र सुधांशु शेखर झा ने व्यक्त किया

सुधांशु शेखर ने एक पुराने संस्मरण को सुनाते हुए बताया कि 23 जनवरी 1996 को भारत सरकार द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज की स्मृति मे प्रायोजित म्यांमार से दिल्ली तक के आजाद हिंद फौज एकसपेडिसन टीम का आगमन धनबाद मे हुआ था। लाखों की भीड़ ने 23 जनवरी की रात्रि के लगभग आधे पहर को टीम का स्वागत चिरकुंडा के विशाल श्रम कल्याण केंद्र मैदान मे किया था।

उक्त टीम का नेतृत्व आजाद हिंद फौज के कर्नल ढिल्लन ,लक्ष्मी सहगल,कैप्टन एस एस.यादव, प्रख्यात अभिनेता-सह- सांसद सुनील दत्त, प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के ओ.एस.डी. अखिल बक्षी साहब कर रहे थे और चिरकुंडा कार्यक्रम उपरांत रात्रि विश्राम उन्होंने मैथन मजुमदार निवास के कौमरा हाऊस मे किया था।
श्री झा ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय से घोषित आयोजन समिति के धनबाद जिला प्रभारी साथ ही त्रि सदस्यीय तत्कालीन बिहार प्रदेश समिति के वे महासचिव थे।साथ ही धनबाद जिला कार्यक्रम आयोजन स्वागत समिति के अध्यक्ष तत्कालीन धनबाद उपायुक्त भा.प्रा.से. महावीर प्रसाद, उप विकास आयुक्त भा.प्र.से. सुनील बर्थवाल, आरक्षी अधीक्षक भा.पु.से. सुनील कुमार थे।
श्री झा ने कहा कि शेरा सिंह ने तब उनके एक अजीज राजनैतिक सहयोगी-मित्र-पत्रकार गोविंदपुर के विनोद आनंद के माध्यम से उनसे संपर्क किया तथा खालसा होटल के समीप सुनील दत्त साहब एवं आजाद हिंद फौज के सहयोगियों का स्वागत करने की उत्कट आकांक्षा सरदार शेरा सिंह ने व्यक्त किया था जिसे हमने आयोजनकर्ता के रूप मे सहर्ष स्वीकार किया था और खालसा होटल के समक्ष भव्य स्टेज बनाकर शेरा सिंह ने सुनील दत्त साहब और टीम का यादगार स्वागत समारोह किया था।
तदुपरांत बीतते समय के साथ साथ हमारा पारस्परिक रिस्ता मजबूत होता चला गया। अपने दौ जवान बेटों को एकसाथ सड़क र्दुघटना मे खोने के बाद शेरा सिंह काफी टूट गये थे और एक समय गोविंदपुर छोड़कर जाने की बात कहने लगे थे परंतु उस पुत्र वियोग की पीड़ा को भी झेलते हुए वे यहीं बने रहे परंतु अभी वगैर किसी को भनक दिये चुपचाप रात की ट्रेन पकड़कर सपरिवार वे धनबाद को अलविदा कह गये जिसकी खबर दूसरे दिन सुबह समाचारपत्र के द्वारा मिलते ही लोग अचंभित और सन्न रह गये। शेरा सिंह का यहां से यूं चले जाना धनबाद के नाम पर एक बदनुमा दाग है जिसमें हम सबों की तटस्थता भी कहीं ना कहीं राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्तियों मे अपराध की श्रेणी मे है।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
