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उड़िसा के जाजपुर में श्री विमला देवी शक्तिपीठ है

ByAdmin Office

Sep 27, 2022

 

*या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥*

माता दुर्गा के इस जगत प्रसिद्ध श्लोक का अर्थ है कि जो देवी इस लोक में रहने वाले समस्त प्राणियों के अंदर शक्ति रूप में स्थित हैं, उन महादेवी के चरणों में हम सभी का बारंबार नमस्कार है। वैसे तो माता का निवास कण-कण में है, लेकिन माता के भक्त माता के विभिन्न शक्तिपीठों के माध्यम से उनके विभिन्न स्वरूप के दर्शन कर अपने जीवन का कल्याण करते हैं। उन्हीं शक्तिपीठों में सबसे प्रमुख है ओडिशा प्रांत के जाजपुर में स्थित श्री विमला देवी शक्तिपीठ। इसे विरजाक्षेतर शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है, जो कि हिंदुओं का एक प्राचीन तीर्थ स्थल है।

*पौराणिक कथा*

पौराणिक कथा के अनुसार जब माता सती ने अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ कुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी, और जब भगवान शंकर को इसका पता चला तो उनका तीसरा नेत्र खुल गया और वे सती के पार्थिव शरीर को यज्ञ कुंड से निकाल कर दुखी होते हुए सारे भूमंडल में घूमने लगे। इससे ब्रह्मांड में प्रलय व हाहाकार मच गया। पृथ्वी समेत तीनों लोकों को व्याकुल देखकर भगवान विष्णु अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर धरती पर गिराते गए। तब जगत जननी माता सती ने शिवजी को दर्शन दिए और कहा कि जिस-जिस स्थान पर उनके शरीर के अंग अलग होकर गिरेंगे, वहां महाशक्तिपीठ का उदय होगा।

इस कथा को आधार बनाते हुए प्राचीन काल से ही ऐसी मान्यता है कि यहां देवी सती की नाभि गिरी थी। देवी सती के गिरे अंग के स्थान पर निर्मित इस शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी को देवी बिराजा (विराजा) या देवी गिरिजा के नाम से पूजा जाता है, जो मां दुर्गा की दिव्य मूर्ति के रूप में यहां विराजमान हैं। वहीं, यहां विराजमान भगवान शिव देवी बिराजा के साथ भगवान जगन्नाथ के रूप में पूजे जाते हैं।

*देखते हैं मंदिर का महत्व और इतिहास*

13वीं शताब्दी में बना बिरजा मंदिर में देवी बिरजा के विराजमान होने के कारण यह शक्तिपीठ मंदिर विमला देवी के साथ ही बिराजा देवी मंदिर एवं गिरिजा देवी मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर अत्यंत विशाल है, जहां बहुत सारे शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान देवी मां की प्रतिमा अति मनोहारी है, माता एक हाथ से भाला तो दूसरे हाथ से महिषासुर दैत्य की पूंछ पकड़े हुए हैं।

*उड़िसा के जाजपुर एक प्राचीन हिंदू तीर्थ स्थल है, जिसका नाम राजा जजाति केसरी से पड़ा है।*

जाजपुर को देवी विमला के कारण विमलापुरी भी कहा जाता है। प्रसिद्ध बिराजा देवी मंदिर के कारण जाजपुर बिराजा पीठ के नाम से भी प्रसिद्ध है, जो किसी समय ओडिशा राज्य की राजधानी भी रह चुका है। सदियों से बिरजा (विराज) क्षेत्र के रूप में विख्यात रहा ओडिशा का यह पवित्र शहर ब्रह्मा के पंचक्षेत्रों में से एक माना जाता है, जो प्रसिद्ध दशाश्वमेध नामक यज्ञ की पावन-स्थली भी रहा चुका है।

*मंदिर का खास आकर्षण*

मान्यता है कि बिराजा देवी मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पित किया गया चढ़ावा सीधे बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाता है। दुर्गा एवं काली पूजा के अवसर पर यहां भव्य उत्सव मनाया जाता है। दुर्गा पूजा के अवसर पर यहां आयोजित होने वाला कार-उत्सव खास आकर्षण का केंद्र रहता है। इस उत्सव के दौरान, देवी का रथ नौ दिनों तक लगातार मंदिर के चारों ओर घूमता रहता है, और इसे ‘चलंती प्रतिमा’ के नाम से भी जाना जाता है।

*यहां मौजूद अन्य और भी दर्शनीय स्थल हैं*

विभिन्न ऐतिहासिक मंदिरों के कारण ही जाजपुर को वैतरणी तीर्थ भी कहा जाता है। यहां के प्रसिद्ध मंदिरों में जगन्नाथ मंदिर, वराह मंदिर, राम मंदिर, सिद्धेश्वर मंदिर, वेलेश्वर मंदिर, किलातेश्वर मंदिर, वरुणेश्वर मंदिर, छलिया बाता मंदिर और दशाश्वमेध घाट प्रमुख है, लेकिन बिराजा देवी मंदिर ही यहां का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।

*अन्य मान्यता के अनुसार*

भारत के ओडिशा राज्य के पुरी जनपद में स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के ठीक सामने बना माता विमला मंदिर को पुरुषोत्तम क्षेत्र शक्तिपीठ कहा जाता है, जहां देवी सती के दोनों पैर गिरने की मान्यता है। हालांकि, कुछ जानकारों द्वारा इस शक्तिपीठ को ही उत्कल बिराजा शक्तिपीठ माना जाता है। भारत के पूर्वी तटीय क्षेत्र में समुद्र के समीप नील पहाड़ी पर बसा पुरी शहर एक मशहूर पर्यटन स्थल है। यह शहर प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के लिए जाना जाता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के अवतार भगवान जगन्नाथ लकड़ी से बनी मूर्ति के रूप में विराजमान हैं।

*आइए जानते हैं कैसे पहुंचे विरजाक्षेतर शक्तिपीठ ?*

*रेल मार्ग- हावड़ा-चेन्नई रेलमार्ग के मध्य जाजपुर नगर स्थित*

*केवनझार रोड यहां का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है।*

सड़क मार्ग- जाजपुर से लगभग 27 किलोमीटर दूर स्थित इस शक्तिपीठ स्थल के लिए अच्छी सड़क सेवा उपलब्ध है।
हवाई मार्ग- भुवनेश्वर यहां का निकटतम हवाई अड्डा है, जो जाजपुर से लगभग 121 किलोमीटर दूर स्थित है।


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