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राष्ट्रीय कानून दिवस (26 नवम्बर)* *भारत में प्रतिवर्ष 26 नवम्बर को राष्ट्रीय विधि दिवस अथवा राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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Nov 26, 2022

 

इसी दिन भारत का संविधान स्वीकार किया गया था। “विधि दिवस” मनाये जाने की परम्परा सर्वप्रथम भारत के प्रख्यात विधिवेत्ता डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी के प्रयासों और सुप्रीम कोर्ट बार एशोशिएशन द्वारा सन 1979 में प्रारंभ हुई। इस दिवस को भारतीय संविधान दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

*जानें राष्ट्रीय कानून दिवस का इतिहास*

26 नवंबर 1949 के पश्चात करीब 30 वर्षों बाद भारत के उच्चतम न्यायालय के बार एसोसिएसन ने 26 नवम्बर की तिथि को राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में घोषित किया था। तब से प्रति वर्ष यह दिवस पूरे भारत में राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। विशेषकर विधिक बंधुत्व को बढ़ावा देने या इस तरह की विचारधारा को फैलाने के लिए इस दिवस का महत्व है। वस्तुतः यह दिवस संबिधान को निर्मित करने वाली संबिधान सभ के उन 207 सदस्यों के अतुलनीय योगदान को देखते हुए और उन्हें सम्मान देने के लिए आयोजित किया जाता है।

*जानते हैं राष्ट्रीय कानून दिवस का उद्देश्य*

भारत के उच्चतम न्यायलय के बार एसोसिएसन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुसार भारत का उच्चतम न्यायलय मानवाधिकारों और शांति को बनाये रखने में संबिधान का रक्षक है। यह सर्वदा समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों में अपनी सहभागिता अदा करता है। साथ ही समाज के मूल कर्तव्यों को भी आगे बढाने में सहभागी होता है, और इसके उद्देशों को गति प्रदान करता है।

यह विधि के नियमों को स्थापित करने के साथ-साथ लोकतंत्र का रक्षक भी होता है और मानवाधिकारों की रक्षा भी करता है। संबिधान के अनुच्छेद 21 के तहत इस सन्दर्भ में बहुत सारी जानकारियां दी गयी हैं। साथ ही विधि के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को भी परिभाषित किया गया है।

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राष्ट्रीय कानून दिवस (26 नवम्बर) का इतिहास, महत्व, थीम और अवलोकन
राष्ट्रीय कानून दिवस (26 नवम्बर) का इतिहास, महत्व, थीम और अवलोकन
राष्ट्रीय कानून दिवस संक्षिप्त तथ्य
कार्यक्रम नाम राष्ट्रीय कानून दिवस (National Law Day)
कार्यक्रम दिनांक 26 / नवम्बर
कार्यक्रम की शुरुआत 1979
कार्यक्रम का स्तर राष्ट्रीय
कार्यक्रम आयोजक भारत
राष्ट्रीय कानून दिवस का संक्षिप्त विवरण
भारत में प्रतिवर्ष 26 नवम्बर को राष्ट्रीय विधि दिवस अथवा राष्ट्रीय कानून दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भारत का संविधान स्वीकार किया गया था। “विधि दिवस” मनाये जाने की परम्परा सर्वप्रथम भारत के प्रख्यात विधिवेत्ता डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी के प्रयासों और सुप्रीम कोर्ट बार एशोशिएशन द्वारा सन 1979 में प्रारंभ हुई। इस दिवस को भारतीय संविधान दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

राष्ट्रीय कानून दिवस का इतिहास
26 नवंबर 1949 के पश्चात करीब 30 वर्षों बाद भारत के उच्चतम न्यायालय के बार एसोसिएसन ने 26 नवम्बर की तिथि को राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में घोषित किया था। तब से प्रति वर्ष यह दिवस पूरे भारत में राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। विशेषकर विधिक बंधुत्व को बढ़ावा देने या इस तरह की विचारधारा को फैलाने के लिए इस दिवस का महत्व है। वस्तुतः यह दिवस संबिधान को निर्मित करने वाली संबिधान सभ के उन 207 सदस्यों के अतुलनीय योगदान को देखते हुए और उन्हें सम्मान देने के लिए आयोजित किया जाता है।

राष्ट्रीय कानून दिवस का उद्देश्य
भारत के उच्चतम न्यायलय के बार एसोसिएसन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुसार भारत का उच्चतम न्यायलय मानवाधिकारों और शांति को बनाये रखने में संबिधान का रक्षक है। यह सर्वदा समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों में अपनी सहभागिता अदा करता है। साथ ही समाज के मूल कर्तव्यों को भी आगे बढाने में सहभागी होता है, और इसके उद्देशों को गति प्रदान करता है।

यह विधि के नियमों को स्थापित करने के साथ-साथ लोकतंत्र का रक्षक भी होता है और मानवाधिकारों की रक्षा भी करता है। संबिधान के अनुच्छेद 21 के तहत इस सन्दर्भ में बहुत सारी जानकारियां दी गयी हैं। साथ ही विधि के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों को भी परिभाषित किया गया है।

*राष्ट्रीय कानून दिवस के बारे में अन्य विवरण*

*भारतीय कानून से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य:*

भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

भारतीय दंड संहिता 1860 में अंग्रेजों द्वारा निर्धारित किया गया था जोकि भारत में आपराधिक कानून का आधार है। 1973 मे निर्धारित दंड प्रक्रिया संहिता, आपराधिक कानून की के प्रत्येक पहलुओं को अपने तरीके से नियंत्रित करता है और दिशा-निर्देशित करता है।

भारतीय कंपनी कानून वर्तमान में अद्यतन हो चुका है अतः इसका नाम बदलकर कंपनी अधिनियम 2013 कर दिया गया है।

भारतीय संविधान के लेखन के दौरान इसमें आयरलैंड, संयुक्त राज्य अमेरीका, ब्रिटेन और फ्रांस के कानूनों को समाहित (synthesize) किया गया था। भारतीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार और वातावरण संम्बधी दिशानिर्देशों के अनुरूप है। इसमें कुछ अंतरराष्ट्रीय कानूनों, जैसे बौधिक अधिकारों आदि, को भारत में लागू किया गया है।


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