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इस आश्रम में हैं राम मंदिर की मूल मूर्तियां ! बाबर से बचाकर पुजारियों ने पहुंचाया था यहां

ByAdmin Office

Jan 2, 2024

 

*कर्नाटक :* राममंदिर और रामलला के लाखों करोड़ों भक्तों के लिए एक बड़ी खबर है. यह खबर बाबरी मस्जिद से पहले के राम मंदिर में रखीं भगवान राम की मूल मूर्तियों के संबंध में हैं. कर्नाटक के दावणगेरे स्थित समर्थ नारायण महाराज आश्रम में राम मंदिर में रखीं मूल मूर्तियां रखी गई हैं.

यह मूर्तियां मंदिर पर बाबर के हमले से ठीक पहले यहां के पुजारियों ने गायब कर दी थी. इन मूर्तियों को रातोंरात कर्नाटक के इस आश्रम में पहुंचा दिया गया था.

इस आश्रम के पुजारियों ने एक शिलालेख के हवाले से यह दावा किया है. साथ ही चुनौती दी है कि उनकी बातों की सत्यता की जांच कराई जा सकती है. आश्रम के पुजारी का कहना है कि भगवान राम की मूर्ति कन्नडिगा से बनी है. इसमें इस्तेमाल किया गया पत्थर कर्नाटक का है. पुजारियों ने दस्तावेजों और शिलालेख के हवाले से दावा किया है कि अयोध्या में राम मंदिर पर खतरा आया तो वहां के पुजारियों ने राम, लक्ष्मण और सीता की मूल मूर्तियों को गायब करा दिया.

*मूर्तियों की वजह आश्रम का नाम छोटी अयोध्या*

इसके बाद यह मूर्तियां रातोंरात दावणगेरे आश्रम पहुंच गई थीं. कहा कि दावणगेरे जिले के हरिहर में तुंगभद्रा नदी के तट पर श्री समर्थ नारायण महाराज के पूर्वजों को सौंपी गई थी. तब से इन्हें यहीं पर सुरक्षित रखा गया है. इन मूर्तियों की वजह से ही इस आश्रम का नाम दूसरी अयोध्या भी है. पुजारी के मुताबिक इस आश्रम में करीब साढ़े 5 सौ साल से पूजी जा रही मूर्तियां ही असली मूर्तियां हैं. बता दें कि समर्थ नारायण महाराज और उनका आश्रम साल 1986 में सुर्खियों में था. उस समय उन्होंने अश्वमेध किया था.

*बाबर के हमले से ठीक पहले आईं मूर्तियां*

इस दौरान उन्होंने एक वर्ष तक लगातार घोड़े की बलि दी थी. दावा किया जाता है कि ऐसा यज्ञ कलियुग में और किसी ने नहीं किया. दावा किया जा रहा है कि बाबर ने जब बाबरी मस्जिद विध्वंस कराई थी, उस समय इस आश्रम का संचालन समर्थ रामदास महाराज के पूर्वज करते थे. उस समय अयोध्या में राम मंदिर के पुजारियों को बाबर के हमले का अंदेशा हो गया था. ऐसे में रातों रात राम, लक्ष्मण और सीता की मूल मूर्तियों को निकालकर वहां के पुजारियों ने समर्थ नारायण महाराजा के पूर्वजों को सौंप दिया था.इन मूर्तियों को पहले नर्मदा तट पर लाया गया था. फिर वहां से इन मूर्तियों को तुंगभद्रा तट पर लाकर आश्रम में रखवाया गया. इस संबंध में आश्रम में एक शिलालेख भी है. यह शिलालेख संस्कृत में लिखा है.

*पुजारी ने किया सत्यता का दावा*

पुजारी के मुताबिक समर्थ नारायण महाराज खुद बाल भिक्षु थे. बाद वह गृहस्थ बने फिर देशाटन भी किए.आखिर में 05 जुलाई 1990 को उन्होंने देहत्याग किया. अब उनकी बेटी का बेटा प्रभुदत्त महाराजा इस आश्रम की देखरेख करते हैं. समर्थ नारायण महाराज बाबरी मस्जिद राम मंदिर विवाद में प्रतिवादी भी थे. पुजारी ने दावा किया कि उनकी बातें तथ्यों पर आधारित हैं. बावजूद इसके कुछ लोग इसे नकारते हैं. ऐसे में तमाम वैज्ञानिक उपाय हैं, जिनसे इन मूर्तियों की वास्तविकता प्रमाणित हो सकती हैं.


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