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राजू के ब्रेन में ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिश:अब न्यूरो फीजियोथेरेपी की ली जा रही मदद, हाथ और पैरों में भी मूवमेंट बढ़ा*

ByAdmin Office

Aug 24, 2022

*राजू के ब्रेन में ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिश:अब न्यूरो फीजियोथेरेपी की ली जा रही मदद, हाथ और पैरों में भी मूवमेंट बढ़ा*

*नयी दिल्ली* राजू श्रीवास्तव के ब्रेन को छोड़कर पूरी बॉडी सामान्य रूप से काम कर रही है। ब्रेन में संक्रमण को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। डॉक्टर्स ने अब अपना पूरा फोकस उन्हें होश में लाने पर कर दिया है। इसके लिए अब राजू को न्यूरो फीजियोथेरेपी देनी शुरू की गई है। एक्सपर्ट फीजियोथेरेपिस्ट की टीम उनकी बॉडी को ट्रीट कर रही है। राजू की बेटी अंतरा ने भी पिता का स्वास्थ्य स्थिर होने की जानकारी दी है।

*ब्रेन के दो हिस्सों में ऑक्सीजन सप्लाई ठीक*

डॉक्टर्स के मुताबिक, राजू के फोरब्रेन (दिमाग का ऊपरी हिस्सा) में ऑक्सीजन न पहुंचने से वे होश में नहीं आ पा रहे हैं। वहां तक ऑक्सीजन पहुंच गई तो उनको होश में आने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। हार्ट अटैक के बाद राजू के ब्रेन को करीब 20 मिनट तक ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो पाई थी। इस वजह से ही वे कोमा में हैं। ब्रेन के बाकी 2 हिस्सों में ऑक्सीजन सप्लाई ठीक है।
पत्नी शिखा, बेटी अंतरा, बेटा आयुष्मान के साथ राजू श्रीवास्तव।

*वेंटीलेटर सपोर्ट कम करने की कोशिश*

राजू के परिवार के करीबी सुनील कनौजिया ने बताया कि डॉक्टर्स उन्हें होश में लाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। वे 15 दिनों से पूरी तरह कोमा में हैं। वेंटीलेटर सपोर्ट भी कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ICU में पत्नी शिखा को छोड़कर किसी को भी एंट्री नहीं दी जा रही है।
कानपुर में राजू के छोटे भाई काजू की पत्नी श्रेया ने नीम का पौधा लगाकर जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
हाथ और पैरों में मूवमेंट बढ़ा
10 अगस्त को हार्ट अटैक के बाद बेहोश हुए राजू को अब तक होश नहीं आ सका है। हालांकि, अब उनके हाथों और पैरों में मूवमेंट पहले के मुकाबले बढ़ा है। डॉक्टर्स के मुताबिक, उनकी मेडिकली ग्रोथ काफी स्लो है। लेकिन मौजूदा समय में उनकी हालत से डॉक्टर्स भी बेहद कॉन्फिडेंट हैं। एम्स की न्यूरो हेड डा. पद्मा श्रीवास्तव की देखरेख में उनका ट्रीटमेंट किया जा रहा है।

*गले से दी जा रही है ऑक्सीजन*

राजू के स्वास्थ्य में जिस तरह से सुधार हो रहा है। उनका वेंटीलेटर एक या दो दिन में धीरे-धीरे कुछ घंटों के लिए हटाया जा सकता है। पहले भी एक बार एक घंटे के लिए वेंटीलेटर हटाया गया था। अब वेंटीलेटर सपोर्ट कम किया गया है। मुंह की जगह गले में छेद कर नली से ऑक्सीजन दी जा रही है।


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