
*धनबाद :* जिला मारवाड़ी सम्मेलन के जिला अध्यक्ष कृष्णा अग्रवाल ने सरकार द्वारा 1932 के खतियान लागू करने पर अपनी तीब्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल जनविरोधी बल्कि असंवैधानिक भी है।भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से ये प्रावधान है कि जाती, लिंग,भाषा,क्षेत्र एवं सम्प्रदाय के आधार पर शाषण भेद भाव नही करेगा। 1932 का खतियान अवसर की समानता के मूल भावना के प्रतिकूल है।

निष्पक्ष सरकार वो होती है जो राज्य के तमाम निवासियों की चिंता करती है 1932 या 1985 का खतियान से कोई फर्क नही पड़ता झारखंड राज्य के साढ़े तीन करोड़ जनता के जीने मरने,जान माल,वयवसाय की हिफाजत कर मान सम्मान की रक्षा करें वास्तव में वही सरकार एक अच्छी सरकार है और जो सरकार ऐसा करेगी वही जनता के बीच लोकप्रिय सरकार होगी।किसी एक खास वर्ग के पक्ष लिया गया निर्णय भविष्य के लिए काफी घातक सिद्ध हो सकता है सरकार को झारखंड में निवास करने वाले सभी निवासियों को एक नज़र से देखना समझना चाहिए।

मेरे दादाजी 1948 में धनबाद आये थे अब उनकी चौथी पीढ़ी यहां निवास करती है तो क्या हमें झारखंड राज्य का मूल निवासी नही माना जाना चाहिये।1932 का खतियान लागू करना सिर्फ और सिर्फ वोट की राजनीति का ज्वलन्त उदहारण है क्षेत्रवाद के नाम पर आपसी संघर्ष से जो अग्नि प्रज्वलित होगी क्षेत्रीय दलों को उसपे अपनी रोटी सेंकना एक मात्र मूल उद्देश्य है।अन्ततः यह कदम राष्ट्रीय भावना को खंडित करेगा।पूर्व में ही यह राज्य ब्रिटिश कालीन से ही (1908 CNT Act) जैसे कानून के कारण अपने ही लोगो द्वारा,अपने ही लोगो का शोषण का एक अनुपम उदहारण बना हुआ है।
लोग अपने ही वर्ग जाती को अवने पौने दाम पर जमीन बेचने को बाध्य है।
अंत मे श्री अग्रवाल ने झरिया विधायिका पूर्णिमा नीरज सिंह की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दलगत भावना से ऊपर उठकर साहसिक पहल करते हुए राष्ट्रीय भावना को प्रकट किया है।इसके लिए मैं उनका बहुत बहुत आभार एवं साधुवाद व्यक्त करता हूँ।
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