
उमेश कुमार गिरि

काँड्रा की महिलाओं ने बताया
सविता देवी, राखी देवी, जोशना गिरि , प्रियंका गिरि लाली देवी, मीनाक्षी खुशबू आदि महिलाओं ने इस पर्व को मनाने का मुख्य उद्देश बताया!

बहनों द्वारा भाइयों की सुख समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना करती है करमा पर्व के कुछ दिन पहले से ही महिलाएं एवं युक्तियां नदी या तालाब से बालू उठाकर डाली में भरती है और सात प्रकार के अनाज होती है, जौ, गेहूं कुलथी धान चना उड़द मकई आदि
इस पर्व पर महिलाओं ने बताया प्राचीन कथा
प्राचीन कथा के अनुसार , कर्मा और धर्मा नामक दो भाई थे वह अपनी छोटी बहन से बहुत प्यार करते थे मेहनत करने के बाद वह काफी गरीब थे उनकी बहन भगवान की भक्ति किया करती थी और कर्म पौधे की पूजा करती थी एक बार जब दुश्मनों ने गांव पर हमला कर दिया तब दोनों भाइयों ने बहादुरी से लड़ते हुए गांव वालों और अपनी बहन को बचाया तब बहन ने खुश होकर करम पौधे की पूजा की और अपने भाइयों के लिए धन मांगा इससे वे काफी अमीर हो गए तब से कर्म पौधे की पूजा भाई बहन के द्वारा होती आ रही है झारखंड में आदिवासी समुदाय में काफी हर्ष उल्लास के साथ इस पर्व त्यौहार को मनाया जाता है
जियलगढा पंचायत के सभी गांव में भी करमा पूजा हर्ष उल्लास सांस्कृतिक पारंपरिक धार्मिक खोरठा लोक गायन के साथ महिलाएं युक्तियां पारंपरिक पोशाक मे सांस्कृतिक मादर और ढोल की मधुर आवाज मे झूमती और नाचती हुई खोरठा गीत में मंडली के साथ देखा गया
!! आज रे करम गोसाई घर दुवारे काइल रे करम गोसाई काशी नदी पारे !!
जावा मां जावा किया किया जावा
जैसे लोकगीत से गुजमान गोविंदपुर हुआ पूरा क्षेत्र प्राकृतिक सांस्कृतिक पर्व करमा सभी अपने मान्यताओं के अनुसार हर्ष उल्लास के साथ ढोल मादर थाप पर झूमते नाचते नजर आते हैं महिलाएं एवं युक्तियां पारंपरिक एवं सांस्कृतिक पोशाक पहनकर करम डाली आंगन के बीचोबीच गाडते है और उस डाली के परिधि परिक्रमा ढोल मादर छाप पर झूमते हुए लोक गायन प्रस्तुति करते हैं और धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार पर्व त्यौहार भादो महीना एकादशी के दिन इस त्योहार को मनाते हैं और उसके बाद तालाब नदी पोखर धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार विसर्जन करते हैं
झारखंड प्रदेश का या एक लोकप्रिय सांस्कृतिक प्राकृतिक पर्व है जिसमें महिला वर्ग और युक्तियों और आदिवासी समुदाय का यह खास पर्व त्यौहार है
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