
डुमरी:प्रखंड के डुमरी और निमियाघाट थाना क्षेत्रों में इन दिनों कई स्थानों पर जुआरियों के अड्डे दिन भर लगे रहते हैं,जिससे जगह-जगह आसामाजिक तत्वों का जमघट लगा रहता है.
बताया जाता है कि जिले के पुलिस कप्तान के सख्त निर्देश के बावजूद दशहरा पर्व से ही क्षेत्र के रोशनटुंडा,रांगामाटी,बरमसिया,पारसनाथ रेलवे स्टेशन से लगे हनुमानगढ़ी,पंजाबी टोला,कुलगो,
घुटवाली,घुजाडीह,तिरंगा मोड़,मंझलाडीह,इसरी रेलवे फाटक,पोरदाग,वनांचल चौक के आसपास,विभिन्न होटलों आदि जगहों में जुए के अड्डे सजने लगे,जो दीप पर्व दिवाली के आते-आते काफी गर्म हो गए हैं.

पुलिस द्वारा महज खानापूर्ति के लिए धर-पकड़ कर जुआ के इस सामाजिक कोढ़ में लिप्त लोगों को कुछ ले देकर छोड़ दिए जा रहे हैं.बताते हैं कि इस क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक स्थल इसरीबाजार में तो प्रत्येक वर्ष कई नामी-गिरामी व्यवसायियों के साथ-साथ कई ऐसे लोग जो स्वंय को सामाजिक कार्यों से सरोकार रखने का दंभ भर कर आगे रहकर दबंगता दर्शाते हैं,वे भी इन जुओं के अड्डों को सजाने में अहम् भूमिका निभाते हैं. यहां पिछले वर्षों में जुओं में कार,घर मकान आदि जीतने वालों को देखकर भोले-भाले लोग भी लालशा के वशीभूत हो कर अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई इन पेशेवर जुआरियों की भेंट चढ़ा देते हैं,जिससे उनके परिजनों को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है.सूत्रों की माने तो कई दिग्गज तो दस बीस पचास हज़ार से लेकर लाखों का दांव लगाने से भी बाज नहीं आते लेकिन इन अड्डों तक सामान्य लोगों की पहुंच नहीं हो पाती.दूसरी ओर ऐसे जुओं के अड्डों के संचालन के लिए अच्छा-खाशा नजराना भी चुकाना पड़ता है.यह अड्डे सभ्य समाज के उन ठेकेदारों की होती है,जिनका क्षेत्र में बड़ा नाम है.जुए के इन अड्डों के संचालन के कारण असामाजिक तत्वों,अपराधियों की एक साथ जमघट देखते ही बनती है.इस सामाजिक बुराईयों की भेंट सबसे अधिक महिलाओं को होना पड़ता है।

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