
वास्तु शास्त्र में बहुत सी ऐसी चीजों का जिक्र किया गया है, जो घर में सकारात्मकता तो देती ही हैं. साथ ही, व्यक्ति को दुर्भाग्य से भी मुक्ति मिल जाती है. इन्हीं चीजों में से एक है घोड़े की नाल के उपाय.

वास्तु शास्त्र में कई ऐसी चीजों का जिक्र किया गया है, जो व्यक्ति की तरक्की के रास्ते खोलती हैं. मान्यता है कि घोड़े की नाल को सौभाग्य का प्रतीक माना गया है. इसे घर पर सही दिशा और सही जगह पर लगाने से सुख-समृद्धि का वास तो होता ही है. साथ ही, व्यक्ति की तरक्की के नए रास्ते बनते हैं. वास्तु शास्त्र में घोड़े की नाल को लेकर कई उपाय बताए गए हैं.

घोड़े की नाल को बहुत ही लाभकारी और शुभ फलदायी माना जाता है. बुरी नजर से बचने के लिए भी घोड़े की नाल का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, कहा जाता है कि इसके शुभ परिणाम तभी सामने आते हैं, जब घोड़े की नाल को वास्तु नियमों के अनुसार इस्तेमाल किया जाए. आइए जानते हैं घोड़े की नाल का महत्व और इसे लगाने के नियम.
*घोड़े की नाल का महत्व*
वास्तु जानकारों का कहना है कि घोड़ी की नाल दो तरह की होती है. एक यू पैटर्न की और एक रिवर्य सू पैटर्न की. कहते हैं कि दोनों ही पैटर्न का इस्तेमाल घर, दुकान या ऑफिस में किया जा सकता है. कहते हैं कि अगर इसे नियमानुसार दुकान या ऑफिस में लगा लिया जाए, तो व्यक्ति के अच्छे दिनों की शुरुआत हो जाती है. इतना ही नहीं, इसे बहुत ही शुभ माना जाता है.
*इतनी फायदेमंद है घोड़े की नाल*
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर से नकारात्मकता और बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए घोड़े की नाल का प्रयोग किया जाता है. कहते हैं कि इसे घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर पाती और घर में सिर्फ पॉजिटिव एनर्जी का वास होता है. घोड़े की नाल से सुख-समृद्धि आती है. इतना ही नहीं, व्यक्ति की धन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं. वहीं, व्यापार में आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है. घोड़े की नाल बुरी नजर से बचाने में भी मदद करती है.
*यहां लगाएं घोड़े की नाल*
वास्तु जानकारों का मानना है कि घर और दुकान में यू पैटर्न वाली घोड़े की नाल लगाना उत्तम रहता है. इसे घर के मुख्य द्वार पर बाहर की तरफ डोर फ्रेम ऊपर की तरफ लगाया जाता है. इसे उत्तर या पश्चिम दिशा में ही लगाना चाहिए. वहीं, अगर आप रिवर्स यू पैटर्न की नाल का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसके ऊपर आइना भी लगाएं.
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विशेष-प्रदत्त जानकारी व परामर्श शास्त्र सम्मत् दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति मात्र है किसी भी प्रकार का कोई भी प्रयोग किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही करें…
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