
बेंगलुरु :-दिल और दिमाग की जटिल बीमारियां। इलाज और सर्जरी बिल्कुल मुफ्त। चाहे मरीज की उम्र और कमाई कितनी भी हो.ये है बेंगलुरु का सुपर स्पेश्यलिटी हॉस्पिटल ‘सत्य साईं इंस्टिट्यूट ऑफ हायर मेडिकल साइंस’.सारी सुविधाएं विश्वस्तरीय. यहां हर साल डेढ़ हजार हार्ट और सत्रह सौ न्यूरो सर्जरी होती हैं.

*प्रवेश के साथ ही भजन देती है सुनाई*

सत्यसाईं अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही सामने दिखाई देता है विशाल शिखर। जैसे-जैसे भीतर प्रवेश करो, धीमी आवाज में भजन सुनाई देने लगेंगे। ये अस्पताल कम, मंदिर ज्यादा लगता है। दिन की शुरुआत भी प्रार्थना से ही होती है। इस अस्पताल को खास बनाती है जाने-माने 80 डॉक्टरों की टीम। इनमें से कई के पास है अमेरिका, यूरोप सहित दुनिया के कई देशों का अनुभव। मरीज परेशान न हो, इसलिए उसकी मदद करता है यहां का सेवादल। इस टीम के सदस्य मरीज को स्क्रीनिंग ब्लॉक तक ले जाते हैं। चेकअप के बाद मरीज को रजिस्ट्रेशन कार्ड दे दिया जाता है। जिस पर लिखा नंबर ही अस्पताल में उसकी पहचान होता है। फिर कोई लिखा-पढ़ी नहीं होती। यानी पर्चे और फाइलों का यहां कोई काम नहीं। सबकुछ कंप्यूटराइज्ड है। हर जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन सब ऑनलाइन है.
*यहां मरीज को पर्स की जरूरत नहीं पड़ती*
डॉक्टर इन्हें कहीं से भी चैक कर सकते हैं। मरीज जब तक अस्पताल में है, उसे दी जाने वाली सलाह, दवाईयां और भोजन का कोई पैसा नहीं लिया जाता। अस्पताल के पीआरओ प्रो. अनंत रामन तो कहते हैं कि अस्पताल में मरीजों को पर्स की जरूरत ही नहीं पड़ती। यहां आने वाले मरीजों में 60 फीसदी तो ऐसे हैं, जो महीनेभर में डेढ़ हजार रुपए से ज्यादा नहीं कमा पाते.
*साईं फॉलोअप प्रोग्राम देती है अस्पताल*
करीब 50 हजार मरीज हर साल परामर्श के लिए यहां की कार्डियेक ओपीडी में आते हैं। पिछले दस सालों में इस अस्पताल में 28 हजार लोगों की हार्ट और न्यूरो सर्जरी मुफ्त हुई है। सर्जरी के बाद भी मरीजों का ख्याल रखा जाता है। आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु और केरल में तो अस्पताल की एक टीम सर्जरी के बाद मरीजों के घर भी जाती है। यह देखने कि वे अपना ख्याल ठीक से रख रहे हैं या नहीं। इसे नाम दिया गया है साईं फॉलोअप प्रोग्राम।
*टेली मेडिसिन तकनीक का इस्तेमाल*
पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मरीजों के लिए टेली मेडिसिन तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाता है। इन राज्यों में दो नोडल सेंटर बनाए गए हैं जहां जाकर मरीज वीडियो कांफ्रेंसिंग से सीधे हॉस्पिटल के डॉक्टरों से सलाह लेते हैं। अब तक इससे करीब 6 हजार कंसल्टेशन किए जा चुके हैं। जिसके कारण करीब 75 फीसदी लोगों को हॉस्पिटल तक नहीं आना पड़ा।अस्पताल की पूरी कोशिश यही है कि लोगों को बीमारी बोझ न लगे। ये अस्पताल जुटा है, लोगों को निरोगी बनाने के मिशन में। दिवंगत सत्यसाईं बाबा की मां ने उनसे यही तो कहा था। वे चाहती थीं कि सबको स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल की सुविधा मिले।उन्हीं से प्रेरणा लेकर सबसे पहले खुला पुट्टपर्थी का अस्पताल। उसके दस साल बाद 2001 में बना बेंगलुरु का यह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल। सत्यसाईं बाबा अब नहीं हैं, लेकिन पुट्टपर्थी और बेंगलुरु के अस्पतालों में यह काम निरंतर जारी है।
*सिर्फ इलाज नहीं, ईश्वर का आशीर्वाद भी मिलेगा’*
ऐसे कई अस्पताल हैं जहां महंगे उपकरण और अनुभवी डॉक्टर हैं। भव्य बिल्डिंग हैं। लेकिन मरीजों के उपचार से ज्यादा वहां ध्यान मुनाफे पर है। यहां अस्पताल में लोगों को आधुनिक मेडिकल सुविधाएं प्यार भरे वातावरण में मिलेंगी लेकिन उन्हें उसका कोई मूल्य नहीं चुकाना होगा। यहां सिर्फ इलाज ही नहीं, लोगों को ईश्वर का आशीर्वाद भी मिलेगा।
*सत्यसाईं अस्पताल में सुविधा*
333 बेड, 8 ऑपरेटिंग रूम,6 आईसीयू, दो कार्डियेक केथलैब और 24 घंटे इमरजेंसी युनिट है। ब्लड बैंक, रेडियो डॉयग्नोस्टिक, लेबोरेटरी और टेली मेडिसिन की सुविधांए भी हैं।
*मरीजों के लिए ये सुविधाएं*
पूरी जांच के बाद तय होता है मरीज का वेटिंग नंबर। इमरजेंसी की जरूरत है तो तत्काल दाखिला। वेटिंग नंबर आने की सूचना अस्पताल पहुंचाता है। यहां सर्जरी के अलावा जांच, दवा और भोजन भी मुफ्त है।
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