
*बालकांत मंडल*
(अध्यक्ष ,धानुक एकता महासंघ दिल्ली प्रदेश)

बिहार में बाढ़ की त्रासदी और पीड़ित लोगों के दर्द पर राजनीति खूब होती है,सरकार दाबे और राहत की बात भी खूब करती है। लेकिन क्या हकीकत में इन पीड़ितों के आंसू पोछने वाले कोई है। अगर इसका जवाब पूछिये तो लोग कहेंगे नही..!

कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ जब कोशी दियारा के पश्चमी तट पर बसे मधेपुरा प्रखंड के गढ़गांव पहुंचा ।
चारो तरफ बाढ़ के पानी के बाद कीचड़ से सना पूरा क्षेत्र।मरे हुए मवेशी और अन्य जीवजंतु के सड़ान्ध।चारा और भोजन के आभाव में याचना भड़ी निगाहों से हर आगंतुक के तरफ टुकुर टुकुर देखते पशु और मानव समुदाय।उफ..! कितना भयावह !कितना दुखद..!इसे शब्दों में व्यक्त करना बहुत मुशिकल है।
मैं दिल्ली से मधुबनी पहुंचा तो अखिल भारतीय धानुक एकता महासभा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और समाजसेवी राजदेव बांबू का फोन आया कि बाढ़ पीड़ितों के बीच अखिल भारतीय धानुक एकता महासंघ द्वारा कोशी नदी के बाढ़ प्रभावित गढ़गांव में राहत वितरण का काम किया जा रहा है।पहले भी किया गया और इसे लगातार करना है ,तो आइए वहां जाना है।
मैं भी अखिल भारतीय धानुक एकता महासभा के दिल्ली प्रदेश के अध्य्क्ष होने के नाते और राजदेव रमन मंडल जी के आदेश का पालन करने के लिए इस काम में शामिल होने का सौभाग्य मिला। राहत वितरण कार्य में बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजदेव रमन जी,प्रदेश सचिव शिव नारायण मंडल,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष शिया राम मंडल,बिहार प्रदेश के सरक्षक नारायण मंडल,प्रखंड अध्य्क्ष महेश प्रसाद मंडल,संजय मंडल के अलावे और कई गणमान्य लोग मौजूद थे। जिनके साथ हमारा जत्था गढ़ गांव के लिए प्रस्थान किया।हम लोग निजी चार पहिया वाहन से सफर करते हुए सुपौल पहुंचे फिर सुपौल के कोशी नदी के दियारा क्षेत्र में तीन किलोमीटर कीचड़ से सने रास्ते पर पैदल चलकर फिर नाव से कोशी नदी को पार कर पूर्वी तट से पश्चमी तट पहुंचे।वहां से बैल गाड़ी पर बैठकर और राहत सामग्री लेकर तीन किलोमीटर का सफर तय कर गढ़ गांव पहुंचे।
रास्ता दुर्गम, मधुबनी जिला से सुपौल जिला और फिर नदी पार कर फिर मधुबनी जिला के मधेपुरा प्रखंड के गढ़ गांव का यह सफर इतना दुर्गम था कि समझ में इतना तो आ गया कि सरकारी राहत पहुंचाने के लिए इतना कष्ट कर कोई अधिकारी इस गांव तक नही पहुंचने वाले है।और राजदेव बाबू ने यही सोच कर इस गांव का चयन किया है।
अखिल भारतीय धानुक एकता महा सभा इस गांव में राहत वितरण कर रही है,इस काम में सहयोग के लिए हर बर्ग को जाति समुदाय से ऊपर उठ कर आगे आना चाहिए,सहयोग करना चाहिए साथ हीं प्रशासन और सरकार को भी तुरंत उन सभी सुदूरवर्ती क्षेत्र के लिए सज्ञान लेनी चहिये जहां के लोग पीड़ित हैं।बाढ़ के बाद भूख और गरीबी के साथ जमे पानी और कीचड़ के कारण इस क्षेत्र में बीमारी की भी आशंका होती है इस लिए चिकित्सकीय सुबिधा भी चाहिए।इस पर स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सरकार को पहल करनी चाहिए।
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