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इतिहास : निरसा के संबंधपुर में 263 साल पहले राजा शिव नारायण सिंह ने शुरू की थी दुर्गा पूजा

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Oct 11, 2024

 

*धनबाद :* निरसा के संबंधपुर में पांड्रा का राज परिवार 264 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन कर रहा है. संबंधपुर राजबाड़ी में राजा शिवनारायण सिंह ने पूजा की शुरुआत की थी. उनके वंशज इस परंपरा को जारी रखा है.

वर्तमान में उनकी सातवीं पीढ़ी के राजा काशी प्रसाद सिंह के पुत्र बाबन सिंह व उनकी पत्नी की देखरेख में पूजा हो रही है.

 

पहले पूजा पांड्रा गांव में होती थी. राज परिवार के लोग सप्तमी के दिन बाबा कपिलेश्वर मंदिर से नव पत्रिका, दोला, पालकी लाते हैं. सप्तमी और अष्टम अष्टमी को यहां बलि होती है. पहले राजघराने के पुरोहित पांड्रा के राज नारायण भट्टाचार्य पूजा कराते थे. वर्तमान में वीरसिंहपुर के काजल भट्टाचार्य पूजा कराते हैं.

 

*सिंदूर खेला होता है खास, गांव की सभी महिलाओं का होता है जुटान*

 

संबंधपुर में सिंदूर खेला का आयोजन होता है. इसमें गांव की महिलाएं शामिल होती हैं. यहां मेला भी लगता है. राज परिवार के बाबन सिंह ने बताया की स्थापना काल से अष्टमी के दिन मंदिर में एक मिट्टी के घड़ा में पानी रखा जाता है. उसमें तांबा का छोटा कटोरा रख दिया जाता है. कटोरा में छेद होने के बावजूद वह पानी में नहीं डूबता है. नवमी के दिन पूजा शुरू होते ही कटोरा अपने आप पानी में डूब जाता है.

 

*हाथबाड़ी आश्रम में आजादी के पहले से हो रही मां की आराधना*

 

निरसा प्रखंड की हड़ि़याजाम पंचायत के हाथबाड़ी आश्रम में आजादी के पहले से दुर्गा पूजा हो रही है. यहां पर वर्ष 1944 से मां दुर्गा की पूजा हो रही है. पूजा की शुरुआत अश्वनी कुमार भट्टाचार्य ने की थी. उनकी समाधि आश्रम में है. उनके बाद उनके पौत्र हरे कृष्णा चक्रवर्ती तथा वर्तमान में समीर कुमार चक्रवर्ती, पंकज कुमार चक्रवर्ती, देवदास चक्रवर्ती व चक्रवर्ती परिवार द्वारा पूजा की जा रही है. आश्रम में चार मंदिर जिम मां दुर्गा, शिव, गणेश और समाधि स्थल पर मंदिर है. मंदिर का निर्माण 1972 में फटका कोलियरी के मालिक टीलू राम अग्रवाल ने करवाया था. दत्ता परिवार ने आश्रम के लिए जमीन दान दी थी.

 

समीर कुमार चक्रवर्ती ने बताया कि रामकृष्ण मिशन पंचांग के अनुसार आश्रम में मां दुर्गा की पूजा होती है. षष्ठी से कलश स्थापना के साथ देवी की पूजा की जाती है. निरसा के सैकड़ों श्रद्धालु पूजा करने आते हैं.


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