

26 अक्तूबर को भारत में चीनी राजदूत सुन वेइतुंग ने विदाई लेने के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भेंट की।

विदेश मंत्री जयशंकर ने राजदूत सुन वेइतुंग द्वारा कार्यकाल में भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए दिये गये योगदान की सराहना की ।उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंध दोनों देशों के विकास और एशिया व विश्व की स्थिरता तथा विकास बढ़ाने के लिए बड़ा महत्व रखता है ।भारत द्विपक्षीय संबंध के विकास को महत्व देता है और इस में संलग्न है ।

दोनों पक्षों को वार्ता से समानताओं का विस्तार कर यथाशीघ्र ही मतभेदों का समाधान करना ,बहुपक्षीय सहयोग मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों के सुधार को बढ़ाना चाहिए ।
सुन वेइतुंग ने 20 वीं सीपीसी राष्ट्रीय कांग्रेस का परिचय दिया ।उन्होंने कहा कि चीन और भारत प्राचीन सभ्यता वाले पड़ोसी देश हैं और 1 अरब से अधिक आबादी वाले विकासशील देश और अहम नवोदित अर्थव्यवस्थाएं हैं ।
स्वस्थ व स्थिर चीन-भारत संबंध दोनों पक्षों के समान हित में है ।दोनों की समान कोशिशों से चीन-भारत संबंध में आम तौर पर बहाली का रूझान बना रहा है ।चीन भारत के साथ दोनों देशों के नेताओं के अहम समानताओं को लागू कर विभिन्न स्तरों के संपर्क मजबूत कर व्यावहारिक सहयोग व बहुपक्षीय समंव्य गहराना ,मतभेदों का समुचित प्रबंधन व निपटारा करना चाहता है ताकि द्विपक्षीय संबंध यथाशीघ्र ही सामान्य पटरी पर लौटे ।
उस दिन सुन वेइतुंग ने विदाई के दौरान भारतीय विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा से भी मुलाकात की
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