
धनबाद में बिजली संकट ने भयावह रूप धारण कर लिया है. हर गली-मुहल्ले के लोग इस समस्या से त्राहिमाम कर रहे हैं. इधर जनप्रतिनिधि व अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं.

हालत यह है कि इस भीषण गर्मी में बिजली कटौती से लोगों की रातों की नींद भी हराम हो गई है. विगत 10 दिनों से समस्या गहराती जा रही है, क्योंकि बिजली कटौती के घंटे धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं. इधर तीन-चार दिन से 12 से 15 घंटे तक बिजली कटौती शुरू हो गई है. शहरी इलाकों में जहां हर एक से डेढ़ घंटे पर लोड शेडिंग ली जा रही है तो ग्रामीण इलाकों में एक बार में 5 से 6 घंटे तक लोगों को बिजली से महरूम किया जा रहा है. कई इलाकों में लोग विरोध पर भी उतर आए हैं. मगर किसी के कान में जूं तक नहीं रेंग रही.

चैंबर ऑफ कॉमर्स के विरोध के बाद झरिया, बरवाअड्डा, निरसा और कतरास में भी लोगों ने प्रदर्शन किया. लेकिन घंटों बिजली कटौती से जूझ रहे लोगों की परेशानी जेबीवीएनएल के अधिकारियों और धनबाद जिला के जनप्रतिनिधियों को दिखाई ही नहीं दे रही है. राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा यूं तो राज्य सरकार की हर कमजोरियों पर मुखर रहती है, मगर बिजली के मामले में चुप रह कर अपनी उपलब्धियां गिनाने में व्यस्त है. इधर लोगों की प्रतिक्रिया में रोष व परेशानी साथ-साथ झलक रही है.
बलियापुर रोड स्थित सूर्या सिटी में रहने वाले सुशील कुमार मंडल बताते हैं कि बिजली कटौती से लगातार परेशान हैं इनवर्टर भी जवाब दे चुका है. सोसाइटी में चलने वाले जनरेटर की वजह से पॉकेट ढीली पड़ गई है.
तेलीपाड़ा निवासी शंकर साव ने कहा कि शहरी इलाका होने के बावजूद बिजली कटौती की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है. विगत दो दिनों से आंधी और बारिश भी नहीं आई है. फिर भी दिन में हर एक या दो घंटे के बाद लोडशेडिंग के नाम पर बिजली काटी जा रही है.
जेसी मल्लिक रोड निवासी नरेंद्र त्रिवेदी भी बिजली कटौती से क्षुब्ध हैं. कहते हैं कि गर्मी आने के पहले मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती की जा रही है. मेंटनेंस के बाद गर्मी में बिजली कटौती कम होने का नाम नहीं ले रही है. पता नहीं इस परेशानी से कब मुक्ति मिलेगी.
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