
पटना : नीति आयोग योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए बिहार की मदद करेगा। यही नहीं, इसके लिए नीति आयोग ने राज्य सहायता मिशन और राज्य परिवर्तन सेल कार्यक्रम कार्यान्वयन इकाई की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इसके तहत बिहार के अधिकारियों को योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के तौर-तरीके बताए जाएंगे यानी उन्हें यह खास ट्रेनिंग मिलेगी कि वो योजनाओं को अच्छे तरीके से लागू करवा सकें। साथ ही उन्हें विस्तृत रिसर्च के आधार पर कार्ययोजना बनाने में मदद की जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि आयोग ने इसके लिए चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान को लीड नॉलेज इंस्टीट्यूट के रूप में चुना है।

संस्थान ने पिछले दिनों अपनी विस्तृत कार्ययोजना नीति आयोग को सौंपी थी, जिस पर आयोग की मुहर लग चुकी है। यही नहीं, इसके लिए प्रारंभिक तौर पर कार्ययोजना भी तैयार की गई है। इसका आधार रिसर्च को बनाया गया है।

बिहार किस क्षेत्र में बेहतर कर सकता है, इसकी जानकारी व्यापक शोध के बाद होगी। इसके लिए संस्थान बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग के साथ मिलकर विकास रणनीतियों, आर्थिक लक्ष्यों, विजन डॉक्यूमेंट की तैयारी के लिए अनुसंधान इनपुट उपलब्ध कराएगा। आयोग ने इसके लिए दो करोड़ रुपये की राशि भी तत्काल जारी कर दिया है।
इसके अलावा मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए संबंधित हितधारकों के साथ क्षमता निर्माण कार्यक्रम, कार्यशाला, परियोजना, अनुसंधान और परामर्श का आयोजन भी करेगा। खास कर कृषि और संबद्ध क्षेत्रों, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा, महिला और बाल विकास, डाटा एनालिटिक्स और योजना, एम एंड ई, शहरी विकास, कौशल विकास रोजगार और उद्यमिता, और उद्योग के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में विशेष मदद की जाएगी।
*पिछड़ापन दूर करने को चल रहा अभियान*
नीति आयोग, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभाग बिहार सरकार के साथ मिलकर पिछड़े जिलों और प्रखंडों के प्रभावी और तेज विकास को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम शुरू कर दिया है। इससे विकास योजनाओं को रफ्तार मिलेगी। यह सहयोग बेहतर नियोजन और कार्यान्वयन, क्षमता निर्माण और बेहतर तथा सतत सेवा वितरण के लिए प्रणालियां स्थापित करने पर केंद्रित होगा। केंद्र और राज्य के अधिकारी मिलकर इस अभियान का अनुश्रवण करेंगे।
*राज्य परिवर्तन सेल थिंक टैंक के रूप में कार्य करेगा*
राज्य परिवर्तन सेल, राज्य सरकार के थिंक टैंक के रूप में कार्य करेगा। यह योजना एवं विकास विभाग को परियोजना नियोजन, परियोजना विश्लेषण और संबद्ध अनुसंधान गतिविधियों में मदद करेगा। राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को सुधारने के लिए मौजूदा रणनीतियों, पद्धतियों और प्रणालियों का आकलन और मूल्यांकन करेगा।
प्रासंगिक अनुसंधान करेगा, नियमित क्षेत्रीय रिपोर्ट तैयार करेगा। राज्य के प्रमुख प्रगति संकेतकों पर नियमित अपडेट बनाए रखेगा। यह परियोजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन के साथ परियोजना प्रस्तावों के समग्र विश्लेषण के लिए व्यापक निगरानी और मूल्यांकन अभ्यास भी करेगा। बिहार राज्य के प्रमुख प्रगति संकेतकों को अद्यतन बनाए रखना भी इसका अहम उद्देश्य होगा।
*बढ़ती जा रही केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या*
बिहार में केन्द्र प्रायोजित योजनाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उसमें बिहार की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। वर्ष 2015-16 के पूर्व केंद्र प्रायोजित स्कीम की संख्या 28 थी। वर्ष 2023 में यह 107 हो गई है। ऐसे में आयोग इन योजनाओं के अधिकतम लाभ के लिए बिहार को शोधपरक जानकारी भी देना चाहता है।
इधर चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. राणा सिंह ने बताया कि हमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी है। फिलहाल आयोग ने 15 राज्यों में इस योजना को मंजूरी दी है। इनमें बिहार भी शामिल है। इसके तहत शोध परक जानकारी अधिकारियों को दी जाएगी, ताकि उस सेक्टर में बिहार और बेहतर कर सके। मसलन मखाना उत्पादक क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना और बेहतर परिणाम आ सकते हैं। किसानों को और लाभ हो सकता है। यही प्रक्रिया अन्य सेक्टर में ही प्रयोग में लाया जा सकता है।
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