
केंदुआ:- बिरेंद्र पासवान पूर्व प्रदेश सचिव सह प्रवक्ता बाघमारा विधायक प्रतिनिधि ने पत्र , सोशल X ई समाधान के माध्यम से अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन , महानिदेशक, खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS), धनबाद ,कोयला मंत्रालय, भारत सरकार सहित उपायुक्त, धनबाद को पत्र के साथ एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर कहां की धनबाद में जो भू धसान और गैस रिसाव की घटनाएं हो रही है इन सभी घटनाओं से धनबाद सांसद ढुल्लू महतो, झरिया विधायक रागिनी सिंह, धनबाद विधायक राज सिन्हा, बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो सहित धनबाद मेयर संजीव सिंह जी भी चिंतित हैं और सभी चाहते हैं कि इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाई जाएं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट पत्र में लिखा कि धनबाद विधानसभा, झरिया विधानसभा, बाघमारा विधानसभा एवं आसपास के कोयलांचल क्षेत्र में लंबे समय से भूमिगत खनन का इतिहास रहा है। कई स्थानों पर जमीन धंसने, जमीन में दरार पड़ने तथा मकानों एवं बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आती रही हैं।
यह स्थिति केवल वर्तमान की समस्या नहीं है। इसका संबंध उन पुरानी भूमिगत खदानों से भी हो सकता है, जहां दशकों पहले कोयला निकाला गया था और बाद में खनन बंद कर दिया गया। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि यह स्पष्ट किया जाए कि खनन के दौरान और खदान बंद करते समय लागू सुरक्षा नियमों, स्वीकृत Mining Plan तथा Mine Closure Plan के अनुसार सभी आवश्यक कार्य वास्तव में किए गए थे या नहीं। बिरेंद्र पासवान ने निम्नलिखित बिंदुओं पर दस्तावेजी जवाब और स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग करते हुए लिखा कि 1. धनबाद जिले में BCCL की अब तक बंद की जा चुकी सभी भूमिगत खदानों की सूची, उनके बंद होने का वर्ष, खनन क्षेत्र, खनन पद्धति तथा संबंधित Mine Closure Plan की जानकारी सार्वजनिक की जाए। 2. जहां से भूमिगत खनन के बाद खाली workings अथवा goaf बने, वहां उनकी वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कौन-कौन से underground voids आज भी मौजूद हैं। 3. जहां स्वीकृत खनन पद्धति या योजना के अनुसार stowing/backfilling आवश्यक था, वहां कितनी मात्रा में सामग्री भूमिगत भेजी गई, किस क्षेत्र में उपयोग हुई और उसका माप-पुस्तक, लॉगबुक तथा संबंधित रिकॉर्ड क्या कहते हैं—इसकी स्वतंत्र जांच हो। 4. प्रत्येक बंद खदान के shafts, inclines, galleries और अन्य openings को सुरक्षित करने के लिए कौन-कौन से कार्य किए गए थे? उनके completion records और निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं। 5. संबंधित खदानों के स्वीकृत Mine Closure Plan में जो सुरक्षा, स्थिरीकरण, reclamation और rehabilitation कार्य निर्धारित थे, उनमें से कौन-कौन से कार्य पूरे हुए और कौन से लंबित रहे—इसकी खदानवार रिपोर्ट जारी की जाए। 6. जहां वर्तमान में जमीन धंसने या दरारों की शिकायतें हैं, वहां DGPS/Geophysical Survey तथा अन्य उपयुक्त वैज्ञानिक तकनीकों से जांच कर यह निर्धारित किया जाए कि उनका संबंध पुराने underground workings से है या किसी अन्य कारण से। 7. यदि किसी बंद खदान के आवश्यक mine plans, workings के रिकॉर्ड, closure records अथवा सुरक्षा संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो यह स्पष्ट किया जाए कि रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं हैं और उसके लिए संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी किसकी है। 8. पुरानी बंद खदानों में subsidence, underground water, गैस, आग तथा भूमिगत अस्थिरता की निगरानी के लिए वर्तमान में कौन-सी व्यवस्था है? निरीक्षण कितनी बार किया जाता है और रिपोर्ट किस अधिकारी के पास जमा होती है? 9. जिन क्षेत्रों में वैज्ञानिक जांच के बाद भू-धंसान का खतरा पाया जाता है, वहां तत्काल सुरक्षा उपाय, खतरे वाले क्षेत्रों का चिन्हांकन, प्रभावित परिवारों की सुरक्षा तथा आवश्यक rehabilitation/relocation की कार्ययोजना तैयार की जाए। 10. झरिया–बाघमारा–धनबाद क्षेत्र की सभी पुरानी बंद भूमिगत खदानों का स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति/DGMS के समन्वय से तकनीकी ऑडिट कराया जाए। ऑडिट में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए कि

• कहां पुराने underground voids मौजूद हैं;

• कहां subsidence का जोखिम है;
• कहां stowing/backfilling या अन्य stabilization उपाय आवश्यक हैं;
• Mine Closure Plan के कौन-कौन से कार्य पूरे हुए;
• और वर्तमान में तत्काल कौन-कौन से corrective measures जरूरी हैं। पासवान ने आग्रह करते हुए लिखा कि यह किसी व्यक्ति अथवा संस्था पर बिना जांच आरोप लगाने का विषय नहीं है। लेकिन यदि पुराने भूमिगत खनन क्षेत्रों में आज भी नागरिकों की जान-माल पर खतरा है, तो रिकॉर्ड की जांच, वैज्ञानिक सत्यापन और जिम्मेदारी का निर्धारण टाला नहीं जा सकता। बिरेंद्र पासवान ने जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लिखा कि कोयला देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन कोयला उत्पादन की कीमत आम नागरिकों की सुरक्षा से नहीं चुकाई जा सकती। उन्होंने प्रमुखता से अपनी मांगों के उपरोक्त बिंदुओं पर समयबद्ध जांच कराई जाए, उपलब्ध रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं तथा जहां भी तकनीकी या प्रशासनिक कमी पाई जाए, वहां जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाने की मांग की है।
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