
*नयी दिल्ली :* 196 साल पहले आज के दिन शुरू हुआ था दुनिया का पहला हिंदी अखबार, 19 महीने बाद ही करना पड़ा था बंद।

1826 में आज ही के दिन हिन्दी भाषा का पहला समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ कलकत्ता से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू हुआ था। 8 पेज का ये अखबार हर मंगलवार को निकलता था। कानपुर में जन्मे और पेशे से वकील पंडित जुगल किशोर शुक्ल इसके संपादक थे। उदन्त मार्तण्ड ईस्ट इंडिया कंपनी की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मुखर होकर लिखता था।

इस वजह से अखबार कंपनी सरकार की आंखों में खटकने लगा और सरकार ने अखबार के प्रकाशन में कानूनी अड़ंगे लगाना शुरू कर दिए। कंपनी सरकार ने मिशनरियों के पत्र को तो डाक वगैरह की सुविधा दे रखी थी, लेकिन उदन्त मार्तण्ड को यह सुविधा नहीं मिली।
आखिरकार, आर्थिक परेशानियों और कानूनी अड़ंगों के बाद 19 दिसंबर 1827 को केवल 19 महीनों के बाद ही अखबार को बंद करना पड़ा। वैसे, भारत में समाचार पत्रों की शुरुआत 29 जनवरी 1780 के दिन हुई थी। तब एक अंग्रेज जेम्स आगस्टस हिकी ने अंग्रेजी में ‘कलकत्ता जनरल एडवर्टाइजर’ नामक पहला समाचार पत्र शुरू किया था। ये भारत के साथ ही एशियाई उपमहाद्वीप का किसी भी भाषा का पहला समाचार पत्र था।
इसके बाद धीरे-धीरे भारत में समाचार पत्रों के प्रकाशन का सिलसिला शुरू हुआ। बांग्ला, फारसी और उर्दू भाषा में भी समाचार पत्र प्रकाशित होने लगे।
1981: बांग्लादेश के राष्ट्रपति जिया उर्रहमान की हत्या. उनके पास काली साड़ी में उनकी पत्नी खालिदा जिया हैं, जो आगे चलकर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं।
29 मई 1981 को बांग्लादेश के राष्ट्रपति जिया उर्रहमान का चटगांव जाने का प्रोग्राम बना। इसके 4 दिन पहले उन्होंने चटगांव के GOC मेजर जनरल मोहम्मद अबुल मंजूर का तबादला कर दिया था और साथ ही आदेश दिया कि उन्हें लेने जनरल मंजूर एयरपोर्ट पर नहीं आएं।
मंजूर उस इलाके के सबसे बड़े सैनिक अफसर थे। राष्ट्रपति के इन दोनों फैसलों से वे नाराज थे। सुरक्षा बलों को मंजूर की नाराजगी की भनक लग चुकी थी। सुरक्षाबलों ने राष्ट्रपति को चटगांव जाने का कार्यक्रम टालने का आग्रह किया, लेकिन जिया नहीं माने वो चटगांव पहुंचे।
30 मई की अल सुबह करीब साढ़े तीन बजे हमलावर सर्किट हाउस की तरफ रवाना हुए। यहीं पर राष्ट्रपति जिया ठहरे हुए थे। अंदर घुसते ही हमलावरों ने हैंड रॉकेट से सर्किट हाउस पर हमला किया। इसके बाद ग्रेनेड, मशीनगन और रॉकेट से हमले होने लगे। इसी बीच राष्ट्रपति जिया एक कमरे से निकलकर बाहर आए और हमलावरों से बांग्ला भाषा में पूछा – तुम क्या चाहते हो? तभी एक हमलावर ने मशीनगन से जिया पर धुआंधार फायरिंग शुरू कर दी। जिया की मौके पर ही मौत हो गई। केवल 20 मिनटों में ही बांग्लादेश के एक सैनिक राष्ट्रपति को उनकी ही सेना के जवानों ने मार दिया। शेख मुजीब उर्रहमान के बाद जिया दूसरे राष्ट्रपति थे जिनकी हत्या हुई।
1896: पहला रोड एक्सीडेंट
बात 30 मई 1896 की है। इसी दिन इतिहास का पहला ऑटोमोबाइल व्हीकल सड़क हादसा हुआ था। एक तरफ न्यूयॉर्क के हेनरी वेल्स अपनी गाड़ी लेकर घर से निकले वहीं दूसरी तरफ एबलिंग थॉमस अपनी साइकिल लेकर घर से निकलीं। दोनों ही नहीं जानते थे कि उनके साथ एक दुर्घटना होने वाली है, जिसकी वजह से उनका नाम इतिहास में लिखा जाएगा। हेनरी की गाड़ी बेकाबू हो गई और सामने से आ रही थॉमस की साइकिल से जा टकराई। टक्कर से थॉमस का पैर फ्रैक्चर हो गया।
1889: मॉडर्न ब्रा का अविष्कार हुआ
1911 में हर्मिनी केडल ने पहला स्टोर खोला था।
आज ही के दिन 1889 में पेरिस फैशन शो में फ्रांस की हर्मिनी केडल ने आधुनिक ब्रा पेश की। इसके पहले महिलाएं कोर्सेट पहनती थीं। इनमें नरम लकड़ी के टुकड़े का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे पीछे कमर पर कई सारी डोरियों से बांधा जाता था। पेरिस फैशन शो में केडल ने कोर्सेट को दो पीस में बांट दिया और इस तरह मॉडर्न ब्रा की शुरुआत हुई।
1914 में न्यूयॉर्क की मेरी फेल्प्स ने 2 रुमाल और 1 रिबन की मदद से ब्रा बनाई। उन्होंने इसका पेटेंट भी हासिल किया और इसे बैकलेस ब्रा कहा गया। ये हल्की, नरम और ज्यादा कंफर्टेबल थी। उसके बाद जरूरतों और कंफर्ट के मुताबिक ब्रा में कई बदलाव होते गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में आज ही के दिन दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।
30 मई के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए याद किया जाता है…
2015: एलेस्टेयर कुक इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने।
2012: विश्वनाथन आनंद 5वीं बार विश्व शतरंज चैंपियन बने।
1998: अफगानिस्तान में भीषण भूकंप से करीब 5,000 लोगों की मौत हुई।
1987: गोवा को राज्य का दर्जा मिला और गोवा भारत का 25वां राज्य बना।
1919: जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी।
1883: न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन ब्रिज पर भगदड़ में 12 लोगों की मौत हुई। भगदड़ की वजह ब्रिज टूटने की अफवाह थी।
1498: कोलंबस तीसरी बार 6 जहाजों के साथ अमेरिका की यात्रा पर निकले।
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