
अंतर्कथा प्रतिनिधि

जमुई झाझा- बुधवार को झाझा एवं केंदुआलेवार आर्य समाज के तत्वाधान में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती केंदुआलेवार गांव स्थित आर्य समाज मंदिर में हवन पूजन के साथ मनाई गई। मौके पर पंडित वेदप्रकाश आर्य एवं विकास आर्य के द्वारा कुशल यज्ञ हवन भी किया और उसके बाद उपस्थित लोगों के बीच महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डाला। पंडित संजय आर्य,गौरीशंकर आर्य,राजाराम आर्य,आरएसएस के जितेंद्र आर्य सहित अन्य लोगों ने उपस्थित लोगों को महर्षि दयानंद सरस्वती के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हुये कहा कि 19वीं सदी के नवजागरण के पुरोधा महान समाज सुधारक,अदभूत विद्वान,महापुरूष दयांन का जन्म फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की दशमी को सन 1824 में टंकारा में हुआ। उन्होनें राष्ट्र के प्रत्येक युवा को शारीरिक,मानसिक व आंतरिक रूप से मजबूत बनाने के लिये प्रयास किया। महर्षि दयानंदन ने बाल विवाह,जाति प्रथा जैसी कई रूढ़िवादी कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया। मौके पर बड़ी संख्या में आर्य समाज के लोग मौजूद थे।

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