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एआईआरएफ एवं रेलवे बोर्ड की जे सी एम बैठक सम्पन्न

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ByAdmin Office

Feb 17, 2024

 

ऑल इंडिया रेलवमेंस फेडरेशन ने रेलवे बोर्ड के साथ विभागीय समिति की संयुक्त परामर्शदातृ संस्था (डी सी जे सी एम) की दो दिवसीय बैठक 15 तथा 16 फरवरी को रेलवे बोर्ड सभागार

नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता रेलवे बोर्ड की अध्यक्षा सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी जया वर्मा सिन्हा ने किया। कर्मचारी पक्ष की ओर से अध्यक्षता एआईआरएफ के अध्यक्ष डॉ एन कन्हैया तथा संचालन महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने किया। ईसीआरकेयू की तरफ से महामंत्री एस एन पी श्रीवास्तव तथा केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एस एस डी मिश्रा ने प्रतिनिधित्व किया।

बैठक में एआईआरएफ ने कई महत्वपूर्ण मामलों को व्यापक समाधान के लिए प्रस्तुत किया, जिनमें प्रमुख मामले थे –

1- रेलवे बोर्ड स्तर पर जे सी एम तथा पी एन एम बैठकों का नियमित आयोजन किया जाए।

2- ट्रैक मेंटेनर तथा एस एंड टी के कर्मचारियों के रन ओवर होने की घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था की जाए। कर्मचारियों की कमी दूर कर तथा अत्यधिक काम का दबाव कम कर ऐसी घटनाओं को रोकने की बात रखी गई।

3- लेवल एक के 30 प्रतिशत पदों को लेवल दो में अपग्रेड करने पर बनी सहमति के बाद भी अभीतक आदेश जारी नहीं किए गए हैं, इसे जल्द जारी किया जाए।

4- आउटसोर्सिंग कार्य रेलों के संरक्षित परिचालन के लिए सही नहीं है इसपर रोक लगाई जाए।

5- भारतीय रेलवे में सत्रह हजार लोको पायलट के पद खाली हैं, इसे त्वरित कार्यवाही से भरा जाए। साथ ही, ट्रैक मेंटेनर तथा सहायकों के रिक्त पदों पर भी बहाली प्रक्रिया पूरी की जाए।

6- जिन कटेगरी के लिए रिस्क और हार्ड एलाउंस देना बाकी रह गया है उन्हें जल्द शुरू किया जाए।

7- प्वाइंट मैन के पदोन्नति 2800 तक करने के लिए प्रक्रिया पूरी की जाए।

8- एस एंड टी के एम सी एम तथा ट्रैक मेंटेनर को 4200 ग्रेड पे देने के लिए सहमति के बाद भी आदेश जारी करने में अनावश्यक रूप से विलंब हो रहा है। उसे जल्द जारी किया जाए।

9- एच आर एम एस के माध्यम से रेलकर्मियों को अपने ए पी आर निष्पादन में दिक्कत आ रही है। इसके समाधान के लिए समुचित व्यवस्था करते हुए एक अवसर और दिया जाए।

10- नये खुले सेक्शन, दोहरीकरण तथा तिहरीकरण एवं नये विद्युतीकरण हुए सेक्शन में नये पदों का सृजन करते हुए त्वरित बहाली की जाए।

11- अंतर रेलवे तथा अंतर मंडल रेलवे स्थानांतरण के मामलों का त्वरित निस्तारण की जाए।

12- सुपरवाइजर के लेवल 8 से 9 में पदोन्नति के लिए चार वर्ष की वांछनीय सेवा अवधि को दो वर्ष किया जाए।

13- स्पैड मामलों में जस्टिस खन्ना एवं जस्टिस डी पी त्रिपाठी के सिफारिशों को नजरअंदाज कर दंड के किए गए प्रावधानों को समीक्षा कर ठीक किया जाए।

उक्त जानकारी देते हुए एआईआरएफ के जोनल सेक्रेटरी ओ पी शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की इस सर्वोच्च बैठक में एआईआरएफ के कई मांगों पर रेलवे बोर्ड ने अपनी सहमति जताई है और जल्द ही संबंधित आदेशों को जारी करने का आश्वासन दिया है :-

1- कर्मचारियों को अपने ए पी आर को रिव्यू करने के लिए अपील करने का एक और अवसर प्रदान करने से संबंधित आदेश जारी किए जाएंगे।

2- जी डी सी ई के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए सभी आर आर सी को जल्द ही निर्देश दिए जाएंगे।

3- स्पैड मामलों का फिर से विश्लेषण किया जाएगा।

4- रोड साईड स्टेशनों पर काम रात्रि डियूटी करने वाले कर्मचारियों को विश्राम सुविधा उपलब्ध कराने के उपाय पर विचार किया जाएगा।

5- निर्माण विभाग के कर्मचारियों को तदर्थ आधार पर एक अतिरिक्त पदोन्नति देने पर विचार किया जाएगा।

6- ट्रैक मशीन में काम करने वाले कर्मियों को तीन सप्ताह काम के बाद एक सप्ताह विश्राम देने के प्रस्ताव पर भी रेलवे बोर्ड ने विचार करना स्वीकार किया।

7- चिकित्सा विभाग में यार्ड स्टीक पर विश्लेषण किया जाएगा।

8- रनिंग रूम के सुगम संचालन के लिए जोनल और मंडल स्तर पर रनिंग रूम कमिटी को सक्रिय रूप से संचालित किया जाएगा।

9- लेवल वन के रेलकर्मियों को भी टाईप वन के स्थान पर टाईप टू रेलवे आवास आवंटित करने के लिए निर्देश जारी किए जाएंगे।

10- स्थानांतरण आवेदनों पर जारी किए गए एन ओ सी की वैधता समय को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष किए जाने के प्रति निर्देश जारी किए जाएंगे।

11- रेल आवासों की मरम्मत कार्य के लिए 1849. 78 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

 

उक्त निर्णयों के प्रति खुशी व्यक्त करते हुए ईसीआरकेयू के धनबाद मंडल के मिडिया प्रभारी एन के खवास ने कहा कि इन निर्णयों से जल्द ही रेलकर्मियों की बहुत सी समस्याओं का समाधान होगा ईसीआरकेयू धनबाद क्षेत्र के नेताजी सुभाष,सोमेन दत्ता,एन के खवास, बीके दुबे,जे के साव,चंदन शुक्ला,पीके सिन्हा,बीबी सिंह,इंद्र मोहन सिंह,बीके साव,परमेश्वर कुमार और रुपेश कुमार ने इस उपलब्धि एआईआरएफ और ईसीआरकेयू के शीर्ष नेतृत्व और रेलकर्मियों के संघर्ष का सुफल बताया है।


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