
अंतर्कथा प्रतिनिधि

*आखिर विभाग क्यों नहीं लेता है कोई एक्शन, क्या कोई खिचड़ी तो नही पक रही*

लखीसराय (सुजीत कुमार)-: लखीसराय जिले के कजरा पीरी बाजार के नजदीक स्थित प्राथमिक विद्यालय बबुआ बाजार में बच्चो को उनके शिक्षा पाने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। जबकि इस विद्यालय में 70 से अधिक विद्यार्थी संग दो शिक्षक जिनमे प्रभारी राजा प्रताप संग शिक्षक सीताराम की नियुक्ति है लेकिन फिर भी बच्चो को शिक्षा नही मिल रही है। बुधवार 6 फरवरी को सुबह 10 बजे विद्यालय खुला दिखा पर एक भी शिक्षक विद्यालय में उपस्थित दिखाई नहीं दिए कुछ लोगो ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षक लेट ही आते है। इस संदर्भ में सूत्रो के हवाले से बात सामने आई कि बीपीएससी की परीक्षा उपरांत भी यहां मात्र दो मनमाने शिक्षक जिनमे एक प्रभारी तो दुसरा शिक्षक है और दोनो में प्रभारी भोजन, मीटिंग, फाइलों का काम बताकर पल्ला झाड़ते रहते हैं वही दूसरी ओर बच्चो की संख्या ज्यादा बताकर शिक्षक भी परेशानी ही गिनाते हैं। इस संबंध में लखीसराय के अधिकारी से जानकारी लेने पर बताया गया कि शिक्षक को परीक्षा में लगाया गया है और मोबाइल की कॉल काट दी गई। नजारा विद्यालय के बच्चो का सड़क पर दौड़ते और बगल में रखे लोहे से खेलते नजर आए। अब सवाल उठता है कि क्या इन बच्चो के माता पिता अपने बच्चों को यहां दोपहर का भोजन खिलाने को भेजते है या फिर शिक्षा के साथ भोजन को ग्रहण करने। इस दौरान अगर सड़क पर दौड़ते खेलते या फिर इस लोहे के सामग्री के साथ खेलते बच्चे आपस में कोई घटना कर ले या इन बच्चो के साथ कोई दुर्घटना घट जाए तो इसका जिम्मेदार किसे ठहराया जाएगा। इस परिस्थिति में तो इसका जिम्मा प्रभारी शिक्षक पर और शिक्षक प्रभारी पर थोपते दिखेंगे और विभाग इन्हे बचाने के लिए इन्हे कही और किसी विद्यालय में भेज देंगे और दुसरे शिक्षक यहां पहुंच जायेंगे लेकिन क्या तब ये समस्या समाप्त हो जायेगी या सिर्फ ये दिखावा होगा। आखिर विभाग क्यों नहीं ले रहा कोई एक्शन, क्या कोई खिचड़ी तो नही पक रही है। ऐसे में लोग सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को कोसते और बदनाम करते ही दिखेंगे और नतीजा जौ के साथ घुन के पीसने वाली बात होगी अर्थात इनके साथ अच्छे शिक्षक और विद्यालय भी बदनाम होंगे और काला धब्बा उन्हे भी लगेगा।
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