
सरायकेला: सरायकेला में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी हैं. स्थिति इतनी दयनीय की दवाई के अभाव में मरीज अपने इलाज करवाने के लिए नित्य प्रतिदिन संघर्ष कर रहे हैं.
ऐसे में झारखंड सरकार चार साल का कार्यकाल बेहतर बीतने का वाह -वाही लूट रही हैं . सूबे के मुखिया हेमंत सोरेन अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं. पंचायत- पंचायत आपकी योजना- आपकी सरकार- आपके द्वार शिविर लगाकर गांव के अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों को सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का बात कह रहे हैं.
मगर यह योजना कितनी दूर तक पहुंच रही है, सरायकेला का स्वास्थ्य सिस्टम बयां कर रही है. जिसमें गरीब अपने इलाज के अभाव में जान गवा रहे हैं.
सरायकेला जिला फूड एंड ड्रग कंट्रोल ऑफिस परिसर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और यक्ष्मा केंद्र भी है. यहां खुलेआम दवाइयों को जलाया गया है. इनमें पैरासिटामोल से लेकर एंटीबायोटिक दवाइयां, सिरिंज सहित जीवन रक्षक दवाइयों को भी जलाया गया है. इसमें कुछ एक्सपायरी डेट की दवाइयां हैं कुछ के डेट रहते आग के हवाले कर दिया गया है. सवाल ये है कि इसकी जिम्मेदारी किसकी है. इस संबंध में न सिविल सर्जन बोलने को तैयार हैं न विभाग में कोई अधिकारी ऐसा नजर आया जो सामने आकर बताए कि आखिर माजरा क्या है.
जरा सोचिए राज्य की गरीब जनता ईलाज और दवाइयों के अभाव में दम तोड़ रही है और सरकार के इस विभाग में दवाइयों की ये दुर्दशा हो रही है, क्या स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री इसपर संज्ञान लेंगे ? वैसे इस मामले को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष विजय महतो और सरायकेला नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष सह भाजपा नेता मनोज कुमार चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने जिले के उच्च अधिकारियों से जांच की मांग करते हुए दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई की मांग की है. साथ ही चेतावनी दिया है कि यदि मामले पर संज्ञान नहीं लिया गया तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे.
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