

धनबाद : ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया, गोविन्दपुर,में विज्ञान और कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमे अद्भुत फ्रोजेक्ट्स और कलात्मक सृजनों का अद्भुत संग्रह छात्रों ने प्रस्तुत किया ।
इस प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग लिया, जिन्होंनो छात्रों की प्रतिभा, उनकी रचनाशीलता , और विज्ञान तथा प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में छात्रों की दॄष्टिकोण की सराहना की

इस प्रदर्शनी में मिस्टर प्रफुल्ल कुमार बेहरा, आईआईटी आईएसएम धनबाद के पूर्व सहयोगी प्रोफेसर; डॉ. आनंद शंकर हाटी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी आईएसएम मैं सहयक प्रोफेसर; डॉ. एमडी आसिफ, झारखंड के पूर्व मलेरिया नियंत्रण अधिकारी और टीचर ट्रेनिंग कॉलेज मधुबनी से एमडी उस्मान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. एस आालिद, चेयर पर्सन डॉ निखत परवीन, प्राचार्य श्रीमती विधा सिंह, मैनेजर श्रीमती ममता सिन्हा तथा सभी शिक्षक और छात्र मौजूद थे.
इस प्रदर्शनी में विज्ञान के छात्रों ने कई प्रोजेक्ट्स तैयार कर इस प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया जिसमें स्मार्ट होम, होलोग्राम प्रोजेक्टर, चंद्रयाम 3 प्रोजेक्ट, कचरा सफाई प्रबंधन , ट्रैफिक लाइट सेंसर, और अन्य नवाचार भी शामिल थै। साथ ही, कला और शिल्प खंड में दर्शकों को हैरान कर दिया था, जिसमें खूबसूरत पोट्रेट, मधुबनी पेंटिंग्स, लैंडस्केप्स, समकालीन और अमूर्त चित्रकला, और अन्य रचनात्मक अभिव्यक्तियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सभी प्रोजेक्ट्स नवाचारी और सराहनीय थे।
निर्णायक मंडली के सदस्य आईआईटी आईएसएम के पूर्व प्रोफेसर श्री. प्रफुल्ल कुमार बेहेरा. आईआईटी आईएसएम के इलेक्ट्रिकल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर श्री आनंद शंकर
हाटी द्वारा निर्णय लिया गया, जिसमें जल स्तर संकेतक परियोजना ने पहला पुरस्कार जीता। EMP गन ने दूसरा पुरस्कार प्राप्त किया और तीसरे पुरस्कार में दो फ्रोजेक्ट्स, फायर अलार्म और टेस्ला कॉड्ल, के बीच टाई हुआ।
लड़कियों की सुरक्षा उपकरण पर प्रोजेक्ट की विचारधारा और मेहनत को सम्मानित करते हुए सांत्वना पुरस्कार जीता। कार्यक्रम का प्रारंभ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसमें बच्चों ने
योग की प्रस्तुति दी। आरंभ में कविता पर नृत्य, आज फगुने मौत पर झारखंड नृत्य, आत्मरक्षा पर नृत्य नाटिका, संस्कृत श्लोक द्वारा देश की विविधता को अभिव्यक्त किया गया।
गलोबल स्कूल ऑफ इंडिया, गोदिंदपुर, होलिस्टिक शिक्षा का दीप बन रहा है, जो युवा मस्तिष्क का पोषण दिया जा रहा है और नवाचार और रचनात्मकता की संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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