• Mon. Feb 16th, 2026

आज १७ सितम्बर को भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती है , जानिए पूजा विधि, मुहूर्त, महत्व और कथा 

Admin Office's avatar

ByAdmin Office

Sep 17, 2023

 

ब्रह्मांड के सबसे पहले और सबसे बड़े वास्तुकार इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की जयंती हर साल 17 सितंबर को मनाई जाती है। इस दिन लोग मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा करते हैं। हर साल पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, त्रिपुरा, कर्नाटक, असम में इस पर्व को काफी धूम-धाम से मनाया जाता है।

माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से इंसान के सारे कष्ट तो दूर होते ही है, साथ ही उसका बिजनेस दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की भी करता है और उसके कारोबार पर कभी कोई संकट नहीं आता है।

*क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त*

वैसे तो विश्वकर्मा जंयती रविवार को पूरे दिन है और भगवान की पूजा किसी भी प्रहर की जा सकती है, लेकिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा का शुभ मुहूर्त 17 सितंबर को सुबह 7 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। अगर आप कोई पूजा शुभ मुहूर्त में करते हैं तो आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है।

*पूजा विधि*

पूजा वाले दिन सबसे पहले नहाधोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
अगर आप व्रत रखना चाहते हैं को व्रत का संकल्प लें।
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र की पूजाकरें।
अक्षत, हल्दी, फूल, पान, फल सब भगवान को अर्पित करें।
इसके बाद समस्त मशीनों, औजारों की पूजा करें।
आरती करें, प्रार्थना करें और प्रसाद बांटे।

*कथा*

सृष्टि के जनक ब्रह्मा के पुत्र धर्म थे और उनके बेटे का नाम वास्तुदेव था, जो कि बहुत अच्छे शिल्पकार थे। उनके और अंगिरसी के पुत्र का नाम था विश्वकर्मा, जो कि अपने पिता की तरह काफी योग्य और अच्छे वास्तुकार थे। वो काफी चतुर थे, उन्होंने ही कई वस्तुओं का आविष्कार किया था।

*महर्षि दधीचि की हड्डियों से बनाया वज्र*

कहा जाता है कि एक बार राक्षसों ने सभी देवताओं का जीना मुहाल किया था, तब विश्वकर्मा भगवान ने महर्षि दधीचि की हड्डियों से एक बेहद कठोर वज्र का निर्माण किया था, उसी वज्र से इंद्रदेव ने राक्षसों को खात्मा किया था। वो एक सृजनककर्ता थे, उन्होंने रावण की सोने की लंका और भगवान कृष्ण का नगरी द्वारिका. पांडवों की हस्तिनापुर और विष्णु भगवान का सुदर्शन चक्र जैसी कई चीजें बनाई थी।

*नोट:* यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *