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बिजली आपूर्ति की दयनीय स्थिति, श्रृंखलाबद्ध चेकडैम निर्माण कराने और बालू घाटों की नीलामी कराने की मांग विधायक मनीष जायसवाल ने उठाई

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Dec 22, 2022

झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन हजारीबाग सदर विधायक मनीष जायसवाल ने जनहित और राज्य हित में कई मामले को सदन पटल पर उठाया। विधायक मनीष जायसवाल ने बिजली की दयनीय स्थिति को अल्प सूचित प्रश्नकाल के दौरान उठाते हुए हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह जिले सहित राज्य के अन्य डीवीसी कमांड एरिया में इन दिनों बिजली की आपूर्ति मात्र 7- 8 घंटे प्रतिदिन होने की बात कही। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति में भारी कटौती का मुख्य कारण डीपीसी का सरकार पर लगभग हज़ार करोड रुपए राशि का बकाया होना है जिसका खामियाजा जनता को झेलनी पड़ रही है। राज्य में झारखंड बिजली वितरण निगम एवं डीवीसी का बिजली बिल का बकाया राशि घरेलू बिजली उपभोक्ता की तुलना में सरकारी कार्यालयों में आवासों पर अत्यधिक है, जिसे सरकार द्वारा भी जमा नहीं किया जा रहा है जबकि सरकार द्वारा घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के बकाया बिल की वसूली हेतु उक्त उपभोक्ताओं पर दबाव तो बनाती है परंतु अपने बकाया बिल के प्रति गंभीर नहीं है। विधायक मनीष जायसवाल ने उक्त जिलों में बिजली आपूर्ति सुचारू करने के लिए कठोर कदम उठाते हुए राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों एवं आवासों पर बरसों से बकाए बिजली बिल को चालू वित्तीय वर्ष में जमा करने पर विचार करने की मांग सरकार से की। ऊर्जा विभाग के विभागीय मंत्री द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया कि बिजली आपूर्ति सामान्य रूप से हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह जिले में उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जा रही है एवं कभी-कभी अनुपलब्धता होने पर कटौती की जाती है। वर्तमान में डीवीसी से कढ़ाई की गई बिजली के विरुद्ध भुगतान नियमित है एवं 03 जून 2022 तक कार्डी बी सी का बकाया झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के द्वारा एलपीएस रूल,2022 में निहित प्रावधानों के अनुसार किश्तों में किया जा रहा है। सरकारी प्रतिष्ठानों का माह अगस्त, 2022 तक का बकाया 485 करोड़ है। महाप्रबंधक (राजस्व), झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा सरकारी कार्यालयों एवं आवासों से बकाया बिजली बिल भुगतान हेतु संबंधित विभागाध्यक्ष से पत्राचार किया जा रहा है ताकि संबंधित विभागाध्यक्ष द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी कार्यालयों एवं आवासों का विद्युत बकाया राशि जमा कराई जा सके।
अनुसूचित प्रश्नकाल के दूसरे प्रश्न में विधायक मनीष जायसवाल ने जल संसाधन विभाग से संबंधित किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण मामले को उठाया जिसमें उन्होंने हजारीबाग विधानसभा क्षेत्र के सदर प्रखंड स्थित एक कृषि बाहुल्य क्षेत्र होने की बात कहते हुए कहा की यहां सरकारी स्तर से सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है तथा उक्त प्रखंड के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है। उन्होंने कहा कि सदर प्रखंड के कोनार, पनघटवा/होदहोदवा नदी अवस्थित है। इन नदियों में श्रृंखलाबद्ध चेक डैम का निर्माण होने से इस प्रखंड के पंचायत- नयाखाफ, पंचायत- भेलवारा, पंचायत-सिलवार कला, पंचायत- चुटियारो के कई गांवों गांवों के किसानों को सिंचाई का साधन सुगमता से उपलब्ध होगा। विधायक मनीष जायसवाल ने इन नदियों में श्रृंखलाबद्ध चेक डैम के निर्माण की स्वीकृति वर्तमान वित्तीय वर्ष में देने पर विचार करने की मांग सरकार से की। सरकार द्वारा बताया गया कि सदर प्रखंड क्षेत्र के कई गांव में नाला पर सेंटम योजनाओं से सिंचाई सुविधा ग्रामीणों को प्रदान की जा रही है एवं पंचायत नयाखाफ़ तथा पंचायत भेलवारा में कोनार नदी पर चेक डैम निर्माण तकनीकी रूप से संभाव्य नहीं है। पंचायत सिलवार कला में सर्वेक्षण उपरांत तकनीकी संभाव्यता एवं लाभ लागत के आधार पर योजना निर्माण की कार्रवाई की जाएगी ।

विधायक मनीष जायसवाल ने लोकगीत एवं राज्य हित में खान एवं भूतत्व विभाग से संबंधित अति महत्वपूर्ण सवाल को अल्प सूचित प्रश्नकाल और कार्य स्थगन की सूचना के माध्यम से लाते हुए सरकार से राज्य वासियों को सस्ते दर पर बाल उपलब्ध कराने के साथ-साथ राज्य के सभी बालू घाटों की नीलामी चालू वित्तीय वर्ष में करने की मांग रखी। इसी प्रश्न को उन्होंने कार्य स्थगन की सूचना के माध्यम से उठाते हुए इस गंभीर मामले में सभी विधायी कार्यों को रोककर उक्त मामले पर चर्चा कराने की भी मांग की। इस संबंध में विधायक मनीष जायसवाल ने कहा कि हजारीबाग सहित पूरे राज्य की कुल- 108 बालू घाटों की नीलामी वर्ष 2018-19 के बाद सरकार द्वारा वर्ष 2022 में हजारीबाग में 01, चतरा में 04, कोडरमा में 01, दुमका में 02, देवघर में 05, खूंटी में 02, गुमला में 01 एवं सरायकेला खरसांवा में 01 यानी सिर्फ 17 बालू घाटों की नीलामी हुई है परंतु सरकार के लापरवाही में राज्य के सभी बालू घाटों से अवैध बालू निकासी धड़ल्ले से हो रही है और काफी ऊंचे दामों पर बालू बेची जा रही है जिससे सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपए की राशि की क्षति हो रही है। अवैध बालू निकासी कार्य बिना संबंधित स्थानीय पदाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की मिलीभगत से संभव नहीं है क्योंकि राज्य में उक्त मामले में अब तक किसी पदाधिकारियों पर सरकारी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। हजारीबाग, रांची, रामगढ़ एवं देवघर सहित कई जिलों में बालू मांगी होने के कारण राज्य में सैकड़ों लोगों को निजी निर्माण कार्य बंद करा देना पड़ा है। सरकार द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया कि विभिन्न जिलों में बालू घाटों के डीएसआर का अनुमोदन एसआईईएए द्वारा प्रदान किए जाने के उपरांत चिन्हित कैटेगरी- 2 बालू घाटों में जेएसएमडीसी द्वारा इंपैनल्ड एमडीओ का चयन करते हुए बालू घाटों का संचालन प्रारंभ किए जाने की कार्यवाही की जाएगी। वर्तमान में निगम द्वारा राज्य में संचालित बालू घाटों से एक समान दर 7.50 रुपया प्रति घन फिट पर बालू की बिक्री वर्ष 2018 से की जा रही है। अवैध उत्खनन में संलिप्त पाए जाने के मामले में विभाग द्वारा संबंधित पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है ।


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