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भारत के मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध / सुलेख करने का श्रेय प्रेम बिहारी नारायण को जाता है :- डॉ जयदीप सन्याल

ByAdmin Office

Nov 26, 2022

 

 

*यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में 73वां संविधान दिवस पर एन०एन०एस यूनिट ने किया आयोजन*

हज़ारीबाग विनोवा भावे विश्वविद्यालय स्थित यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में एन एस एस यूनिट द्वारा 73वां संविधान दिवस शनिवार को मनाया गया।लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ जयदीप सन्याल ने संविधान दिवस के अवसर पर सभागार में उपस्थित छात्र छात्रों को संबोधित करते हुए कहा किअपना भारत के मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध / सुलेख करने का श्रेय प्रेम बिहारी नारायण को जाता है। मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध करने का मानदेय का प्रस्ताव पंडित नेहरू ने दिया था। इस पर प्रेम बिहारी ने मानदेय लेने से इनकार तो किया पर यह शर्त रखी कि मूल संविधान के सभी पृष्ठों पर उनका नाम अंकित होगा। अंतिम पेज पर उनका व उनके पिताजी का नाम लिखने की मंशा व्यक्त की। पंडित नेहरू ने इस शर्त को सहर्ष स्वीकार किया। मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध करने में पूरे 6 महीने का समय लगा 254 पेन होल्डर निब काम में आए व 303 नंबर की निब इस कार्य के लिए काम में ली गई। प्रेम बिहारी नारायण को पद्म विभूषण सम्मान से सरकार ने सम्मानित किया। देहरादून स्थित भारतीय सर्वेक्षण विभाग कार्यालय द्वारा फोटोग्राफी का कार्य पूरा किया गया।संविधान सभा के सदस्यों के हस्ताक्षर आठवीं अनुसूची के बाद 11 पेज में फैले हुए हैं पहला हस्ताक्षर पंडित नेहरू का है अंतिम हस्ताक्षर फिरोज गांधी का है। सभी सदस्यों के हस्ताक्षर करने के पश्चात जब मूल संविधान पर हस्ताक्षर के लिए संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को निवेदन किया गया तब उन्होंने हस्ताक्षर के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने पर अनुच्छेद आठ में अंकित भाषा की सूची व पंडित नेहरू के हस्ताक्षर के बीच में सीमित जगह पर तिरछी हस्ताक्षर किए। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ने हस्ताक्षर देवनागरी व रोमन लिपि में किए व अबुल कलाम आजाद आदमी उर्दू व पुरुषोत्तम दास टंडन में देवनागरी में हस्ताक्षर किया इनके अलावा सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर अंग्रेजी में किए महात्मा गांधी के हस्ताक्षर मूल संविधान में नहीं मिलते।डॉ सन्याल ने कहा कि मूल संविधान भारत के संसद के पुस्तकालय में 1 पेटी के अंदर सुरक्षित रखा गया है जो कि विशेष नाइट्रोजन गैस से भरा हुआ है।मूल संविधान के वैदिक कार्य के गुरुकुल का दृश्य रामायण से श्रीराम व माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से घर वापस आने का दृश्य, श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को कुरुक्षेत्र में दिए गए गीता का उपदेश, के दृश्यों का दर्शाया गया। इसी प्रकार गौतम बुध व महावीर के जीवन, सम्राट अशोक व विक्रमादित्य के सभागार के दृश्य मूल संविधान में मिलते हैं। इसके अलावा अकबर, शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, टीपू सुल्तान और रानी लक्ष्मीबाई के चित्र भी मूल संविधान में है। स्वतंत्रता संग्राम के दृश्य को महात्मा गांधी की दांडी मार्च से दर्शाया है। इसी प्रकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस का चित्र मूल संविधान में राष्ट्रवादी क्रांतिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है। मूल संविधान में भारत माता का उल्लेख नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चित्र के वर्णन में मिलता है। भारत मूल संविधान की उद्देशिका का काला कार्य विवरण राम मनोहर सिंह द्वारा किया गया उद्देशिका पृष्ठ पर मोहर राम मनोहर सिन्हा ने अपने नाम के केवल राम शब्द का उपयोग करते हुए हस्ताक्षर किए हैं।जयपुर के कृपाल सिंह शेखावत ने मूल संविधान में कला कार्य में योगदान दिया । कृपाल सिंह शेखावत को 1974 में पद्मश्री व 2002 में शिल्पगुरु सम्मान से सम्मानित किया गया। कृपाल सिंह शेखावत ने मूल संविधान में कई चित्र बनाएं। कृपाल सिंह शेखावत जयपुर में वापस आकर परंपरागत ब्लू पॉटरी कला को वापस जिंदा किया जिसमें जयपुर की महारानी गायत्री देवी ने उन्हें प्रोत्साहित किया। मूल संविधान में कला को देखने पर अजंता के भित्ति चित्र याद आने लगते हैं “।
मौके पर उपस्थित डॉ लक्ष्मी सिंह ने संविधान के विषयों पर अपनी बातों को रखा,अधिवक्ता भैया मुकेश ने भी संविधान दिवस पर चर्चा कि साथ ही साथ डॉ सिद्धांत चंद्र ने संविधान की विशेषताओं के बारे में अपने विचारों को रखा । संविधान दिवस पर शपथ ग्रहण भी हुआ कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मियों एवं छात्र छात्राएं का पूरा योगदान रहा।


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