

नईदिल्ली : केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) का लाइसेंस रद्द कर दिया है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले इस फाउंडेशन को अब विदेश से कोई फंडिंग नहीं मिलेगी। साथ ही अब तक जो पैसे आया है, उसके स्रोत की भी जांच होगी। कांग्रेस पार्टी के लिए यह बहुत बड़ा झटका है। Rajiv Gandhi Foundation पर पहली बार 2020 में आरोप लगे थे। कहा गया था कि फाउंडेशन को चीन से 90 लाख रुपए मिले हैं। कानूनों को दरकिनार करते हुए यह फंडिंग की गई थी। कई सवाल उठे, जो गृह मंत्रालय ने जांच शुरू की। अब राजीव गांधी फाउंडेशन (RGF) का एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने का फैसला किया गया है।

राजीव गांधी फाउंडेशन गांधी परिवार से जुड़ा एक गैर-सरकारी संगठन है। राजीव गांधी फाउंडेशन के जरिए कांग्रेस देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों को अंजाम देती है। Rajiv Gandhi Foundation की अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। इनके अलावा राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा भी इसके ट्रस्टी हैं। ट्रस्टियों में मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम जैसे कई बड़े नेता शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जुलाई 2020 में MHA ने एक कमेटी का गठन किया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर फाउंडेशन को रद्द करने का फैसला लिया गया। एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने की सूचना आरजीएफ के पदाधिकारियों को भेजी गई है।
Rajiv Gandhi Foundation: आगे क्या होगा
माना जा रहा है कि इस मामले में कांग्रेस और उसके नेताओं की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। जल्द ही यह केस सीबीआई को सौंप दिया जाएगा। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच शुरू कर सकता है। खासतौर पर चीन से मिली फंडिंग की जांच होगी। यह पैसा कहां से दिया गया और क्यों दिया गया, इसका पता लगाया जाएगा। भाजपा का आरोप है कि चीन से मिली फंडिंग के अलावा भी कई बेनामी ट्रांजेक्शन हुए हैं, इनके बारे में देश को पता लगना चाहिए।
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