

*21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनाई थी जिसे जापान ने 23 अक्टूबर 1943 को मान्यता दी थी।*

*अंगेजों की गुलामी की बेड़ियों मे जकड़ी भारत मां के एक सच्चे और वीर सपूत के तौर पर नेताजी सुभाष च्रंद्र बोस को दर्जा हासिल है. 21 अक्टूबर 1943 के दिन सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति के रूप में स्वतंत्र भारत की प्रांतीय सरकार बनाई थी. यानी आज आजाद हिंद सरकार के गठन की वर्षगांठ है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में बनी इस सरकार को जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड द्वारा भी मान्यता दी गई थी. लेकिन इस सरकार के पहले आजाद हिंद फौज को सबसे पहले राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने 29 अक्टूबर 1915 को अफगानिस्तान में बनाई थी. जिसे बाद में सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया गया था. जिसे बाद में सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार के नाम से स्थापित किया।*

*द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में भारत को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराने के लिए आजाद हिंद फौज या इंडियन नेश्नल आर्मी सशस्त्र सेना का संगठन किया गया था।*
इस फौज का गठन जापान में हुआ. इस फौज की स्थापना भारत के एक क्रांतिकारी नेता रासबिहारी बोस ने टोक्यो में की थी. इसके बाद 28 से 30 मार्च तक उन्हे एक सम्मेलन में आजाद हिंद फौज के गठन को लेकर विचार पेश करने के लिए बुलाया गया था।
*आजाद हिन्द फौज में 8500 सैनिक थे शामिल*
आजाद हिंद फौज के बनने में जापान ने काफी सहयोग किया था. इस फौज में करीब 8500 सैनिक शामिल थे. इसमे एक महिला यूनिट भी थी जिसकी कप्तान लक्ष्मी स्वामीनाथन थी. इस फौज में उन लोगों को शामिल किया गया था जिन्हे जापनान ने बंदी बनाया था. बाद में इस फौज में बर्मा और मलाया में स्थित भारतीय स्वंयसेवक भी भर्ती किए गए. इस सेना में देश के बाहर रह रहे लोगों ने भी हिस्सा लिया. 19 मार्च 1944 के दिन पहली बार आजाद हिंद फौज के लोगों ने झंड़ा फहराया था।
*आइए जानते हैं कैसे हुआ आजाद हिंद सरकार का हुआ गठन*
21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनाई थी. जिसे जापान ने 23 अक्टूबर 1943 को मान्यता दी. सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद सरकार के पहले प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री भी थे. आजाद हिंद सरकार की आजाद हिंद फौज ने बर्मा की सीमा पर अंग्रेजों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी. इस सरकार को जर्मनी, इटवी और उसके तत्कालीन सहयोगी देशों का समर्थन मिला जिसके बाद भारत में अंग्रेजों की जड़ें हिलने लगी. ये सरकार 1940 के दशक में भारत के बाहर ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ एक राजनीतिक आंदोलन था।
*इस सरकार का अपना डाक टिकट और झंडा तिरंगा था. वहीं राष्ट्रगान जन-मन-गण को बनाया गया था. एक दूसरे के अभिवादन के लिए जय हिंद के नारे का इस्तेमाल किया जाता था. 21 मार्च 1944 को चलो दिल्ली के नारे के साथ आजाद हिंद सरकार का हिंगुस्तान की धरती पर आगमन हुआ था।*
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
