
बड़कागाँव।

बड़कागांव। अफ्रीका महादेशों में जानवरों में पाई जाने वाली लम्पी स्कीन डीआईएपीई वायरस बड़कागांव के टिकरीटांड गांव के एक गाय में देखने को मिला। इससे पहले हजारीबाग जिला में बीमारी जब से तेजी फैली हैं।तब से पशुपालकों में चिंता बनी हुई है।
पशुपालकों को जिस बात की चिंता सता रही थी आखिर वही होता हुआ नज़र आ रहा है। बड़कागांव प्रखंड में लम्पी स्कीन वायरस ने दस्तक दे दिया हैं। लम्पी स्कीन वायरस ग्रसित गाय बड़कागांव प्रखंड के टिकरीटांड गांव के एक पशु में वायरस के लक्षण को देखा गया। सफेद रंग के एक गाय के शरीर मे बड़े-बड़े आकार के गांठदार उभार साफ-साफ दिखाई दे रहे।
इससे पहले हजारीबाग जिले के शहरी क्षेत्रों में ही लम्पी वायरस के कुछ मामलों की खबर पुष्टी हुई है। परंतु इस तस्वीर के सामने आने के बाद जिले के ग्रामीण इलाकों में इसके प्रसार से इनकार नही किया जा सकता।
जानकारी के मुताबिक प्रखण्ड में लम्पी स्कीन वायरस के संक्रमण के मामले और भी हो सकते है क्योंकि पशुपालक संबंधित विभाग को सूचना नही पहुंचने के कारण लोगो को जानकारी नही मिल पाता है।
गौतलब हो कि जिला प्रशासन द्वारा लम्पी स्कीन वायरस के बचाव और उपचार को लेकर विशेष नीति के तहत कार्य किया जा रहा है। इसके बावजूद वायरस का ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार चिंताजनक है।
*इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है जाने:-*
इस संबंध में बड़कागांव पशु चिकित्सा डॉ लाइसरम गौसाई सिंह ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया कि वायरस से बचाव और उपचार दो प्रकार से निपटना जा सकता है। उन्होंने बताया कि पशुओं का नियमित साफ-सफाई करें और संक्रमित पशु के सम्पर्क में आने से रोके। यदि पशु संक्रमण का शिकार हो गया है तो सबसे पहले उसे बाकी पशुओं से अलग कर दे। फिर नियमित रूप से बीमारी ठीक होने तक नीम के पत्तो से नहलाये। उन्होंने बताया संक्रमण का प्रभाव 7-8 दिनों तक ही रहता है। इस बीच पशु को सेकंडरी बीमारी का खतरा रहता है। शर्दी, बुखार, भूख न लगना आदि के लिए दवाई दिया जाता है। उन्होंने के बताया कि वायरस के लिए अभी वैक्सीन बनी है लेकिन बाजार में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इम्युनिटी बूस्टर यानी कि मल्टीविटामिन दिया जाता है। पशुओं में इम्युनिटी ऑप्टिमम स्तर पर पहुंचे पर वह खुद ही रिकवर कर जाते है। उन्होंने बताया कि अभी जितने भी मामले आये है ज्यादातर में पशु ठीक हो चुके है। वही डॉ सिंह ने आगे बताया कि तीन चार साल पहले भारत के उड़ीसा में यह बीमारी सर्वप्रथम आई थी। इसी तरह मिलता जुलता बिमारी बकरियों में पाई जाती है। जिसे गोट पोक्स(goat pox) नामक वैक्सीन से ठीक किया जाता है। फिल्हाल इसी वैक्सीन से लम्पी स्कीन वायरस को ठीक किया जा सकता है।

There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
