
धनबाद: सोमवार को झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति ने माझेरपाड़ा दुर्गा मंदिर में ईश्वरचंद्र विद्यासागर का 202 वां जयंती मनाया गया. सर्वप्रथम समिति के सभी सदस्यों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण किया.इस जयंती के अवसर पर मुख्य रूप से समिति के संस्थापक बेंगू ठाकुर उपस्थित थे.उन्होंने अपने वक्तव्य रखते हुए कहा कि 26 सितंबर 1820 को मेदिनीपुर में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था,वह स्वतंत्रता सेनानी भी थे ,उनको गरीब और दलितों के का संरक्षक माना जाता. उन्होंने नारी शिक्षा और विधवा विवाह कानून के लिए आवाज उठाई और अपने कार्यों के लिए समाज सुधारक के तौर पर पहचानने लगे.लेकिन उनका कद इससे कई गुना बड़ा था.उन्होंने बंगाल के स्तंभों में से एक माना जाता है उनके बचपन का नाम ईश्वरचंद्र बंधोपाध्याय का सांस्कृतिक भाषा और दर्शन में अगाध ज्ञान होने के कारण विद्यार्थी जीवन में ही संस्कृत कॉलेज ने उन्हें विद्यासागर की उपाधि प्रदान की थी इसके बाद से उनका नाम इस चंद्र विद्यासागर हो गया था, वह विधवा पुनर्विवाह के प्रबल समर्थक थे विधवा पुनर्विवाह एवं स्त्री शिक्षा के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया था उन्होंने सांस्कृतिक कॉलेज में आधुनिक पश्चिमी विचारों का अध्ययन आरंभ कराया था विधवा पूर्ण विवाह को कानूनी वैधता प्रदान करने वाले अधिनियम को पारित करने वाले में एक नाम उनका भी था उन्होंने बांग्ला भाषा के विकास में भी योगदान दिया था और इसी योगदान के कारण मुझे आधुनिक बंगाली भाषा का जनक माना जाता है, इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बादल सरकार, टनी बनर्जी, राणा चट्टराज, कल्याण भट्टाचार्जी, कल्याण राय,जॉय दास, सुशोभन चक्रवर्ती, शिबू चक्रवर्ती, राजू राय,टूबाई बनर्जी,अमिताभ बनर्जी, अमित मंडल, निमाई लायक आदि लोग शामिल थे.

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