
भारत त्योहारों और परंपराओं का देश है. ऐसे में अलग-अलग मौकों पर यहां रहने वाले लोग अनेकों त्यौहार मनाते हैं. इन सभी त्योहारों और व्रतों का अपना-अपना इतिहास रहा है. इन्हीं में से एक त्योहार है नवरात्रि, नवरात्रि का त्यौहार मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों को समर्पित है.इसका मतलब होता नौ विशेष रातें हैं. इसलिए इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. साल में मुख्य रूप से पांच नवरात्रि मनाई जाती है.
*चैत्र नवरात्रि, शरद नवरात्रि, पौष गुप्त नवरात्रि, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि और माघ गुप्त नवरात्रि*. इनमें से चैत्र नवरात्रि और शरद नवरात्रि का विशेष महत्व होता है.
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर, सोमवार से प्रारंभ हो रहा है. इसका समापन बुधवार 5 अक्टूबर को होगा.

*किस किस तिथि में कौन कौन-सी देवी की होगी पूजा*,
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26 सितंबर 2022 ( सोमवार )
पहला दिन : *मां शैलपुत्री* ( घटस्थापना )

27 सितंबर ( मंगलवार )
दूसरा दिन :*माँ ब्रह्मचारिणी* ( द्वितीया )
28 सितंबर ( बुधवार )
तीसरा दिन: *मां चंद्रघंटा*
( तृतीया )
29 सितंबर ( गुरुवार )
चौथा दिन: *मां कुष्मांडा*
( चतुर्थी )
30 सितंबर ( शुक्रवार )
पाचवां दिन: *मां स्कंदमाता* ( पंचमी )
1 अक्टूबर ( शनिवार )
छठा दिन: *मां कात्यायनी*
( षष्ठी )
2 अक्टूबर ( रविवार )
सातवां दिन: *मां कालरात्रि*
( सप्तमी )
3 अक्टूबर ( सोमवार )
आठवां दिन: *माँ महागौरी*
( अष्टमी )
4 अक्टूबर ( मंगलवार )
नौवां दिन: *मां सिद्धिदात्री*
( नवमी )
5 अक्टूबर ( बुधवार )
दसवां दिन: *विजयदशमी*
( दशमी ) विसर्जन,
*आइए देखते हैं इस नवरात्रि में क्या है खास* ?
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नवरात्रि की सबसे खास बात होती है मां का वाहन. यानी मां किस वाहन पर बैठकर आ रही हैं और किस वाहन पर बैठकर जायेंगी ?
2022 में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आने वाली हैं. दरअसल जब भी नवरात्रि रविवार या फिर सोमवार से आरंभ होती है तो मां का वाहन हाथी होता है. वहीं इस साल माता हाथी पर ही वापस भी जायेंगी. दरअसल विजयदशमी बुधवार को है. जब भी माता की विदाई बुधवार या शुक्रवार के दिन होती है तो माता हाथी के वाहन पर ही वापस जाती हैं.
*आइए जानते हैं नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक मान्यता*
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नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. पहले दिन घरों में कलश स्थापना से नवरात्रि का शुभारंभ होता है. इसके बाद लोग अलग-अलग दिनों पर मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं.
दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और आरती करते हैं, मां दुर्गा को विभिन्न भोग प्रसाद समर्पित करते हैं. इस दौरान देश भर में अलग-अलग शक्तिपीठों पर मेले भी आयोजित किये जाते हैं. इसके अलावा मंदिरों में मां दुर्गा के स्वरूपों की झांकियां तैयार की जाती है. शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में ही भगवान श्रीराम ने देवी शक्ति की आराधना की थी और दुष्ट राक्षस रावण का वध किया था।
*जानते हैं शरद नवरात्रि , पूजा विधि*
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नवरात्रि के पहले दिन व्रती द्वारा व्रत का संकल्प लिया जाता है. इस दिन लोग अपने सामर्थ्य अनुसार 2, 3 या पूरे 9 दिन का उपवास रखने का संकल्प लेते हैं. संकल्प लेने के बाद मिट्टी की वेदी में जौ बोया जाता है और इस वेदी को कलश पर स्थापित किया जाता है. बता दें कि हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक काम से पहले भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया है और कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है इसलिए इस परंपरा का निर्वाह किया जाता है. कलश को गंगाजल से साफ की गयी जगह पर रख दें. इसके बाद देवी-देवताओं का आवाहन करें. कलश में सात तरह के अनाज, कुछ सिक्के और मिट्टी भी रखकर कलश को पांच तरह के पत्तों से सजा लें. इस कलश पर कुल देवी की तस्वीर स्थापित करें. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अखंड ज्योति प्रज्वलित करें. अंत में देवी मां की आरती गायें और प्रसाद को सभी लोगों में बांटें.
*जानते हैं शारदीय नवरात्रि में क्या करें और क्या ना करें*
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इन 9 दिनों में भूल से भी लहसुन, प्याज और मांस मदिरा का सेवन ना करें.
नमक का सेवन ना करें. आप सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं.
चमड़े का प्रयोग ना करें.
अगरबत्ती का प्रयोग ना करें.
खंडित मूर्तियों को पूजा में इस्तेमाल ना करें।
मां दुर्गा की आरती अवश्य करें.
नौ दिनों तक दोनों पहर पूजा अवश्य करें.
माता को अपनी यथाशक्ति के अनुसार अलग-अलग तरह के भोग अर्पित करें.
दिन में सोने से बचें.
इन 9 दिनों में दाढ़ी, मूंछ, और बाल भूल से भी ना काटें.
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर के साफ कपड़े पहनें और तब पूजा करें.
झूठ बोलने से बचें.
ब्रम्हचर्य का पालन करें।
*नवरात्रि में अखंड ज्योत जलाने का महत्व और नियम*
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शास्त्रों में नवरात्रि के 9 दिनों तक लगातार अखंड ज्योत जलाने का विधान बताया गया है. अखंड ज्योत प्रज्जवलित करने के बाद इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि गलती से भी अखंड ज्योत बुझे नहीं और ना ही इसे कभी अकेला छोड़ा जाए. मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत जलाने से भगवती देवी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को मनोवांछित फल देती हैं. इसके अलावा इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अखंड ज्योति हमेशा गाय के शुद्ध घी से ही जलाएं. हालांकि यदि शुद्ध घी नहीं है तो आप तेल से भी अखंड ज्योति जला सकते हैं.
अखंड ज्योत जलाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है और साथ ही व्यक्ति के सभी मनवांछित कार्य पूरे हो जाते हैं. इसीलिए नवरात्रि के पहले दिन व्रत और माता की पूजा का संकल्प लेकर अखंड दीप जलाया जाता है. नवरात्रि के 9 दिनों तक नियम के अनुसार अखंड ज्योति को सरंक्षित करने का प्रावधान होता है. अखंड ज्योत माता की तस्वीर या मूर्ति के दायें ओर रखा जाना चाहिए. यदि आप तेल से अखंड ज्योत जला रहे हैं तो उसे माता के बाईं ओर रख दें. इसके अलावा ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा, देवी देवताओं का स्थान माना जाता है. इसीलिए अखंड ज्योति हमेशा इसी दिशा में रखना शुभ होता है. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अखंड ज्योति की बाती बार-बार न बदलें.
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