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जानिए बैंक मोड़ मुठभेड़ में मारे गए इकलौते बेटे शुभम की कहानी..कैसे नकली आर्मी ऑफिसर बनने की झूठी कहानी रचकर बन गया बैंक डकैत..

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ByAdmin Office

Sep 7, 2022

 

धनबाद
धनबाद के बैंक मोड़ मुठभेड़ में पुलिस की गोली से मारा गया अपराधी धनबाद के भूली के रहने वाला शुभम कुमार सिंह है उसके पिता का नाम विश्वजीत सिंह है.. वे कतरास के एक आउटसोर्सिंग कंपनी में बोलबो ड्राइवर हैं.. शुभम के दादा रामचंद्र सिंह रिटायर्ड BCCL कर्मचारी हैं..वे अपने बेटे विश्वजीत सिंह के साथ भूली B ब्लॉक क्वार्टर नंबर 299 में रहते हैं शुभम विश्वजीत सिंह का इकलौता पुत्र था इसके अलावा शुभम से दो छोटी बहनें भी हैं..

विश्वजीत बिहार आरा के मझउआ गांव का रहने वाला है ..
हाल के दिनों में उसका संबंध बिहार के बेउर जेल में बंद कुख्यात अपराधी सुबोध सिंह और राजीव सिंह गिरोह से जुड़ने की बात कहीं जा रही है..बैंक मोड़ से पकड़े गए दो अपराधियों में एक का नाम गुंजन उर्फ राघव लखीसराय के बड़हिया का है तो दूसरे का नाम आसिफ उर्फ निर्मल सिंह समस्तीपुर का निवासी है..

शुभम के पिता विश्वजीत सिंह के अनुसार उसके बेटे ने डीएवी कुसुंडा से 10 वीं और 12वीं किया था.. 2020 में पॉलिटेक्निक कॉलेज की परीक्षा में राज्य में 73 बार रैंक लाया था इसके बाद यूपीएससी की तैयारी के लिए पटना भेजा गया.. 2021 में उसने पिता को जानकारी दी कि एनडीए में उसका चयन हो गया है ..पिता को एक मेल आईडी पर इंडियन आर्मी का मेल भेजा हालांकि वो मेल वास्तविक है फर्जी पिता को नहीं मालूम..शुभम ने अपने पिता को बताया था कि UPSC के द्वारा NDA की परीक्षा में वो पास कर गया है अब सेकेंड लेफ्टिनेंट बन गया है उसका पुणे के खड़कवासला में ट्रेनिंग शुरू होने वाली है ..वो पिता से हमेशा अपने खर्च के लिए पैसा लेता रहा है..यहां तक यूपीएससी की तैयारी कराने के लिए उसे पटना भेजा था..उसके दादा ने भी उसे खर्च के लिए पैसे दिए थे..

पिता को यह विश्वास नहीं हो रहा है कि शुभम ने उन लोगो से झूठ बोला था.. उसके इंडियन आर्मी में सेकंड लेफ्टिनेंट बनने की सूचना पर भूली में मिठाई बंटी थी..पड़ोसियों के साथ जश्न मनाया था.. हाल में ही शुभम रक्षाबंधन मैं घर आया था और अपनी दोनों बहनों से राखी बनवाने के दो दिन बाद ट्रेनिंग के लिए घर से बाहर निकला था..पिता को इस बात की भी भनक नहीं लगी की धनसार के गांधी रोड में पिछले 10 दिनों से अपराधियों के साथ किराए के मकान में शुभम् खुद भी रह रहा था… मुठभेड़ में मारे गए शुभम के पोस्टमॉर्टम के बाद उसके परिजन अंतिम दर्शन करने पहुंचे..हालांकि शुभम के नजदीकी रिश्तेदार व कुछ परिजन जहां उसका अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई वहीं बेटे के करतूत से दुखी बेटे का शव ले जाने से मना कर थे हालांकि बाद में परिजनों की सलाह पर शुभम् का शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए निकले…


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