• Tue. Mar 31st, 2026

आइए जानते हैं पूजा पाठ से जुड़ी हुईं महत्वपूर्ण बातें (वस्तु टीप्स)*

Admin Office's avatar

ByAdmin Office

Sep 7, 2022

 

(1)एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।

(2)सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।

(3)बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।

(4)जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।

(5)जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए।

(6)जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।

(7)संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।

(8)दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।

(9)यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।

(10)शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है,

(11)कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं।

(12)भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।

(13)देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।

(14)किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।

(15(एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए ।

(16)बिना यज्ञोपवीत या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।

(17)शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।

(18)शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुमकुम नहीं चढ़ती।

(19)शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।

(20)अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावे।

(21)नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।

(22)विष्णु भगवान को चावल गणेश जी को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।

(23)पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।

(24)किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें।

(25)पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।

(26)सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।

(28)गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।

(29)पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।

(30)दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।

(31)सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।

(32)पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।

(33)पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।

(34)घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।

(35)गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं। भैरव की पूजा में तुलसी स्वीकार्य नहीं है।

(36)कुंद का पुष्प शिव को माघ महीने को छोड़कर निषेध है।

(37)बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नहीं करते।

(38)रविवार को दूर्वा नहीं तोड़नी चाहिए।

(39)केतकी पुष्प शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए।

(40)केतकी पुष्प से कार्तिक माह में विष्णु की पूजा अवश्य करें।

(41)देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को बुझाना नहीं चाहिए।

(42)शालिग्राम का आवाह्न तथा विसर्जन नहीं होता।

(43)जो मूर्ति स्थापित हो उसमें आवाहन और विसर्जन नहीं होता।

(44)तुलसीपत्र को मध्यान्ह के बाद ग्रहण न करें।

(45)पूजा करते समय यदि गुरुदेव,ज्येष्ठ व्यक्ति या पूज्य व्यक्ति आ जाए तो उनको उठ कर प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष कर्म को समाप्त करें।

(46)मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन होता है और अंत में शास्त्रीयविधि से गंगा प्रवाह भी किया जाता है।

(47)कमल को पांच रात,बिल्वपत्र को दस रात और तुलसी को ग्यारह रात बाद शुद्ध करके पूजन के कार्य में लिया जा सकता है।

(48)पंचामृत में यदि सब वस्तु प्राप्त न हो सके तो केवल दुग्ध से स्नान कराने मात्र से पंचामृतजन्य फल जाता है।

(49)शालिग्राम पर अक्षत नहीं चढ़ता। लाल रंग मिश्रित चावल चढ़ाया जा सकता है।

(50)हाथ में धारण किये पुष्प, तांबे के पात्र में चन्दन और चर्म पात्र में गंगाजल अपवित्र हो जाते हैं।

(51)पिघला हुआ घी और पतला चन्दन नहीं चढ़ाना चाहिए।

(52)प्रतिदिन की पूजा में सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ाएं।

आसन, शयन, दान, भोजन, वस्त्र संग्रह, विवाद और विवाह के समयों पर छींक शुभ मानी गई है।

_____☀️?️??️✴️_______

विशेष-प्रदत्त जानकारी व परामर्श शास्त्र सम्मत् दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति मात्र है किसी भी प्रकार का कोई भी प्रयोग किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही करें…
_______________________________

?️????????️


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed