
रांची :झारखंड में सत्तापक्ष अपनी कुर्सी बचाने में, तो विपक्ष किसी भी हाल में सत्ता से यूपीए को बेदखल करने के खेल में व्यस्त है. छोटे-बड़े तमाम मीडिया का एंगल फिलवक्त राजनीति ही है. उधर, झारखंड की उप राजधानी दुमका में एक लड़की को सिरफिरे युवक ने एकतरफा प्यार में जिंदा ही जलाकर मार डाला. दुमका से लेकर राजधानी रांची तक बात पहुंचती है. लेकिन उस लड़की तक यूपीए और एनडीए का कोई शख्स नहीं पहुंच पाता है.
रांची के रिम्स में अंकिता नाम की लड़की तड़प कर जान दे देती है. मौत के बाद सोशल मीडिया पर इक्का-दुक्का नेता अंकिता के लिए आंसू बहाते हैं. लेकिन उसके रहते उसकी बेहतर इलाज के लिए किसी ने जहमत नहीं उठायी. खैर अब सोशल मीडिया पर “अंकिता हम शर्मिंदा हैं” ट्रेंड कर रहा है. शायद कानूनी प्रक्रिया से अंकिता को मरने के बाद न्याय मिल भी जाए. लेकिन रांची के उसी रिम्स में झारखंड की एक आदिवासी बेटी एक रसूखदार शख्सियत की हैवानियत की वजह से तड़प रही है. एक।रिटायर्ड आईएएस की पत्नी और भाजपा की नेत्री ने सुनीता नामक इस लड़की के साथ ऐसे अत्याचार किये हैं कि हैवानियत भी शरमा जाये. बर्बरता की दास्तां हम आपको किस्तवार बतायेंगे.नरक से बदतर कर दी जिंदगी
है. गुमला की रहने वाली सुनीता को उक्त अधिकारी के रिश्तेदार के यहां मेड के रूप में रखवा देता है. सुनीता के घरवाले उसे यह सोचकर भेज देते हैं दिल्ली में काम करेगी तो उसके घर की गरीबी दूर होगी. लेकिन कौन जानता था कि उसकी जिंदगी नर्क से भी बदतर होने जा रही है. चार साल काम करने के बाद आज से करीब छह साल पहले उसके रिश्तेदार वापस रांची आ जाती है. जब तक दिल्ली में रही सब ठीक ठाक रहा लेकिन जब उसके साथ सुनीता भी आ जाती है. उसके बाद यहां जब से उस कथित नेत्री के परिवार में मेड बनी तब से उसके हाथों पिछले छह साल से वह किस तरह से प्रताड़ित हुई है और उसके साथ किस तरह रोंगटे खड़े करने वाले जुल्म हुए हैं, इसकी गवाही उसके जिस्म पर मौजूद दर्जनों जख्म देते हैं. उसके दांत तोड़ दिये गये हैं. उसे गरम तवों से दागा गया है. फर्श पर पेशाब तक जीभ से साफ करने तक की सजा उसे दी गयी. सुनीता को नहीं पता कि उसका जुर्म क्या था, जिसकी सजा उसे मैडम ने किस्तों में दी. उसे कुछ दिन पहले पुलिस ने उसके घर से मुक्त कराया है. उसका इलाज रिम्स में चल रहा है. हम इस खबर के साथ सुनीता की दो तस्वीरें लगा रहे हैं. पहली तस्वीर वह, जब सुनीता भली-चंगी थी और दूसरी तस्वीर वह जो आज-कल की है.

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