• Thu. Oct 15th, 2026

अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 95वीं जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई

admin's avatar

Byadmin

Oct 15, 2026
crescent ad

 

अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, बरियो मोड़, गोविंदपुर, धनबाद में भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं युवाओं के प्रेरणास्रोत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 95वीं जयंती बड़े उत्साह, सम्मान और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के बी.एड. प्रशिक्षुओं के लिए भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षुओं को डॉ. कलाम के प्रेरणादायक जीवन, उनके वैज्ञानिक योगदान, शिक्षा के प्रति समर्पण, राष्ट्रनिर्माण में उनकी भूमिका तथा उनके उच्च आदर्शों से परिचित कराना था।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन संघर्ष, परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का अद्भुत उदाहरण है। एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। वे न केवल एक महान वैज्ञानिक थे, बल्कि एक संवेदनशील शिक्षक, दूरदर्शी विचारक और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने वाले व्यक्तित्व भी थे। उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने प्रशिक्षुओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने तथा अपने शैक्षिक एवं व्यावसायिक जीवन में उनके आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया।

भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण के रूप में बी.एड. प्रशिक्षुओं के बीच भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रशिक्षुओं ने पूरे उत्साह, आत्मविश्वास और तैयारी के साथ भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उनके भाषणों में डॉ. कलाम का प्रारंभिक जीवन, उनकी शिक्षा, वैज्ञानिक उपलब्धियाँ, भारत के अंतरिक्ष एवं रक्षा कार्यक्रमों में योगदान, राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका तथा देश के विकास के प्रति उनकी दूरदृष्टि जैसे विषय प्रमुख रहे।

प्रतिभागियों ने अपने भाषणों के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि डॉ. कलाम का जीवन प्रत्येक विद्यार्थी और युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर प्रयास, कठिन परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण के महत्व को रेखांकित किया। प्रशिक्षुओं ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि डॉ. कलाम विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करने के लिए ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, रचनात्मक सोच अपनाने, नई खोजों के प्रति रुचि रखने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित करते थे।

सभी प्रतिभागियों ने एक से बढ़कर एक प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किए। उनके विचारों और प्रस्तुतिकरण ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, रोचक एवं प्रेरणादायक बना दिया। भाषणों के माध्यम से उपस्थित शिक्षकों और प्रशिक्षुओं को डॉ. कलाम के व्यक्तित्व, कृतित्व और विचारों से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हुईं।

प्रतियोगिता में प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन

भाषण प्रतियोगिता में प्रशिक्षुओं ने अपनी प्रतिभा, अभिव्यक्ति-कौशल और विषय के प्रति समझ का परिचय दिया। प्रतियोगिता में खुशी दास ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, नासिया खानम और आशुतोष कुमार शैल ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रमुख स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों में अपनी पहचान बनाई। सभी प्रतिभागियों के भाषण सराहनीय रहे और उन्होंने डॉ. कलाम के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं तथा उनके विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता के माध्यम से प्रशिक्षुओं को सार्वजनिक मंच पर अपने विचार व्यक्त करने, विषय का गहन अध्ययन करने, तथ्यों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने तथा आत्मविश्वास के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर मिला। शिक्षक-प्रशिक्षण के दृष्टिकोण से इस प्रकार की गतिविधियाँ विशेष महत्व रखती हैं, क्योंकि भविष्य में शिक्षक बनने वाले प्रशिक्षुओं के लिए प्रभावी संप्रेषण, तार्किक चिंतन, नेतृत्व क्षमता और विद्यार्थियों को प्रेरित करने की योग्यता आवश्यक है।

डॉ. कलाम का जीवन और शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का संपूर्ण जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर अभ्यास और शिक्षा के प्रति समर्पण से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान ने भारत को नई पहचान दिलाई। वर्ष 2002 से 2007 तक उन्होंने भारत के राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा की।

डॉ. कलाम विद्यार्थियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय थे। वे मानते थे कि किसी भी राष्ट्र का वास्तविक विकास उसके बच्चों और युवाओं की शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्यों तथा रचनात्मक क्षमताओं पर निर्भर करता है। उनका विश्वास था कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के चरित्र, विचारों, व्यवहार और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को आकार देने में भी योगदान देता है।

अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम इसी शैक्षिक भावना को आगे बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास रहा। भाषण प्रतियोगिता ने प्रशिक्षुओं को यह समझने का अवसर दिया कि एक आदर्श शिक्षक को ज्ञानवान होने के साथ-साथ अनुशासित, संवेदनशील, रचनात्मक और प्रेरणादायक भी होना चाहिए। डॉ. कलाम के जीवन से प्रेरणा लेते हुए भावी शिक्षक विद्यार्थियों में जिज्ञासा, आत्मविश्वास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित कर सकते हैं।

शिक्षकों की सहभागिता

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ मोहम्मद शमीम अहमद, सहायक प्रो. डॉ. नंदन चंद्र पानी, डॉ. नादिरा रहमान, डॉ. ममता कुमारी सिन्हा, प्रो. अब्दुल्ला, प्रो. सत्यनारायण महतो तथा अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने कार्यक्रम में सहभागिता की और प्रशिक्षुओं के उत्साहवर्धन में योगदान दिया।

शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को शैक्षिक एवं प्रेरणादायक स्वरूप प्रदान किया। इस प्रकार के आयोजन प्रशिक्षुओं को पाठ्यक्रम से बाहर निकलकर महान व्यक्तित्वों के जीवन का अध्ययन करने, उनके विचारों पर चिंतन करने तथा अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही, ये गतिविधियाँ महाविद्यालय में स्वस्थ शैक्षिक वातावरण, रचनात्मकता और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करती हैं।

राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरणा

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती का उत्सव केवल एक महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का भी अवसर है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सफलता का आधार निरंतर परिश्रम, अनुशासन, ईमानदारी, ज्ञान के प्रति जिज्ञासा और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण है। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने, उन सपनों को साकार करने के लिए कठिन मेहनत करने तथा देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय में आयोजित भाषण प्रतियोगिता ने प्रशिक्षुओं को इन मूल्यों पर विचार करने तथा एक जिम्मेदार नागरिक और संवेदनशील शिक्षक बनने की प्रेरणा दी। भावी शिक्षकों के लिए यह संदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि वे विद्यार्थियों को केवल परीक्षा में सफल होने के लिए तैयार न करें, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने, स्वतंत्र रूप से सोचने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के योग्य भी बनाएँ।

इस प्रकार, अल-इकरा टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 95वीं जयंती का आयोजन ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और उद्देश्यपूर्ण रहा। कार्यक्रम ने प्रशिक्षुओं के ज्ञान में वृद्धि करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और राष्ट्रसेवा की भावना को प्रोत्साहित किया। डॉ. कलाम के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए सभी ने शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में महत्व देने का संदेश प्राप्त किया।


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *