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Saraikela : छऊ मुखौटा गुरु सुशांत महापात्र को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना सरायकेला के लिए गौरव का क्षण : मनोज कुमार चौधरी

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BySubhasish Kumar

Aug 13, 2026
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सरायकेला। विश्वविख्यात सरायकेला छऊ कला के मुखौटा गुरु श्री सुशांत महापात्र को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के कर-कमलों से प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त होने पर नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष एवं छऊ कला के संरक्षण-संवर्धन के लिए लंबे समय से कार्यरत मनोज कुमार चौधरी ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

श्री चौधरी ने कहा कि सरायकेला छऊ केवल सरायकेला की नहीं, बल्कि भारत की ऐसी सांस्कृतिक धरोहर है जिसने विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। नृत्य, संगीत, युद्ध-कौशल, अभिनय और अद्भुत मुखौटा शिल्प का संगम सरायकेला छऊ को अन्य कलाओं से विशिष्ट बनाता है।

उन्होंने कहा कि सरायकेला की इस महान कला परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखने वाले अनेक गुरु एवं कला साधकों को समय-समय पर पद्म सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। इन सम्मानों ने न केवल कलाकारों की साधना को प्रतिष्ठा दी है, बल्कि सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान को भी देश-दुनिया में मजबूत किया है।

श्री चौधरी ने कहा, “मुखौटा गुरु सुशांत महापात्र जी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलना उनकी वर्षों की कला-साधना और समर्पण का सम्मान है। साथ ही यह पूरे सरायकेला क्षेत्र और छऊ परिवार के लिए गौरव का विषय है। उनके हाथों से निर्मित मुखौटे केवल कला-कृतियां नहीं, बल्कि सरायकेला छऊ की आत्मा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं।”

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से छऊ कला से जुड़ी नई पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलेगी। हमारा सामूहिक प्रयास होना चाहिए कि सरायकेला छऊ नृत्य, उसके पारंपरिक मुखौटा शिल्प तथा इससे जुड़े गुरु एवं कलाकारों को संरक्षण, प्रशिक्षण और उचित मंच उपलब्ध कराया जाए, ताकि यह अनमोल विरासत आने वाली पीढ़ियों तक और अधिक समृद्ध होकर पहुंचे।

श्री चौधरी ने पुनः सुशांत महापात्र जी को बधाई देते हुए कहा कि “उनका सम्मान सरायकेला की माटी, यहां की कला-साधना और प्रत्येक छऊ कलाकार का सम्मान है। आज पूरा सरायकेला गौरवान्वित है।”


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