
सरायकेला खरसावां नीमडीह थाना क्षेत्र के आदरडीह में रविवार देर रात तक आदरडीह डेवलपमेंट यूनियन की बैठक चली। बैठक की अध्यक्षता जयंत रजक ने की। बैठक में सर्वसम्मति से यूनियन के अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष का चयन किया गया। अगले बैठक में निर्णय को पारित कर यूनियन का रजिस्ट्रेशन भी कराया जाएगा।
बैठक में जमीन दाताओं ने कहा कि किस प्रकार आदिवासियों की जमीन अधिग्रहण की गई, यह सभी ग्रामवासियों को मालूम है। वन भूमि को वन विभाग से किस प्रक्रिया से लिया गया, इस पर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में सबसे अधिक भूमि बिहार सरकार एवं वन विभाग की है।

महिलाएं बैठक में पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि एस एम स्टील पावर प्लांट द्वारा 3 बीघा जमीन को चारों तरफ जेसीबी से गड्ढा कर घेर लिया गया है। वर्षों से उस जमीन पर खेती करना मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों ने कहा कि आज भी कुछ दलाल गरीब महिलाओं के घर पहुंचकर जमीन बेचने का दबाव बना रहे हैं।
जमीन दाताओं ने आरोप लगाया कि भोले-भाले आदिवासियों की कृषि भूमि को बंजर भूमि लिखवाकर मात्र 11 लाख रुपये प्रति एकड़ में अधिग्रहण कर लिया गया। वहीं अब एस एम स्टील पावर प्लांट के दलाल और पश्चिम बंगाल से आए दलाल उसी जमीन को *20 से 25 लाख रुपये प्रति एकड़* में खरीदने का दबाव बना रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि जमीन के बदले न नौकरी मिली, न रोजगार और न ही कोई बंदोबस्ती की गई। इसका कोई दस्तावेज भी ग्रामीणों के पास नहीं है। लोगों ने कहा कि वे जिला स्तर से लेकर उच्च न्यायालय तक शरण लेंगे और महामहिम राज्यपाल को लिखित ज्ञापन भी सौंपेंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कोई भी ग्रामीण अपने बच्चे की जमीन को न बेचे, क्योंकि न्यायालय के अनुसार ही जमीन का मूल्य निर्धारित होगा।
बैठक में बीते शनिवार को ईचागढ़ के विधायक पूर्व प्रत्याशी सुखराम हेंब्रम द्वारा एक बैठक में सेंदरा करने की दी गई धमकी का भी विरोध हुआ। जमीन दाताओं ने सीधे तौर पर कहा, “हम कोई जंगली जानवर नहीं हैं जिसे सेंदरा किया जाएगा।”
ग्रामीणों का आरोप है कि कृषि भूमि को गलत तरीके से बंजर दर्शाकर अधिग्रहण किया गया और अब दलालों के माध्यम से उसी जमीन को ऊंचे दामों में बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
दलाल घर आकर आधार और अकाउंट मांग रहे, जमीन नहीं देंगे”आदरडीह की बसंती देवी ने खोला मोर्चा, राज्यपाल और हाईकोर्ट जाने का ऐलान।आदरडीह गांव में जमीन अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। आदरडीह डेवलपमेंट यूनियन की बैठक में जमीन दाता बसंती देवी ने दलालों और कंपनी के प्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए।
बाइट: बसंती देवी ने कहा,
“कैसे खेती करेंगे? यही दलाल लोग कह रहे हैं। और वही दलाल लोग मिलकर हमारे घर में हाकिम को भेजते हैं। और उस अभिषेक को भी। वह कहता है कि आप एग्रीमेंट कर दीजिए दीदी, अपना अकाउंट दीजिए, अपना आधार दीजिए, आपको पैसे देंगे। मेरा राज्य से बाहर काम करते हे ,हम विधवा महिला एकला रहता हु।
अगर मुझे पैसे देंगे, तब भी मैं अपना आधार नहीं दूंगी, मैं अपना अकाउंट भी नहीं दूंगी। आप अगर दीदी कहकर पैसे भी देंगे, तो मैं भाई कहकर उठा कर खा लूंगी।”
उन्होंने बताया कि अकीव
मंडल ओर अभिषेक कागज-पत्र लेकर घर आया था और सिग्नेचर करने का दबाव बना रहा था।
“मैंने कहा कि मैं सिग्नेचर नहीं करूंगी। मेरे दो बेटे हैं। एक बेटी और एक बेटा है। इसलिए मैं दोनों को बराबर मानती हूं।
बसंती देवी ने साफ कहा कि वे जमीन नहीं देंगी।
“नहीं, मैं जमीन नहीं दूंगी। हम जमीन नहीं देंगे और जमीन देने के लिए यहां नहीं हैं। अगर हमें न्यायालय जाना पड़े तो मैं जाने के लिए तैयार हूं। उच्च न्यायालय जाएंगे। हाईकोर्ट जाएंगे। फिर भी जमीन कंपनी को नहीं देंगे। जहां भी जाना पड़े, वहां जाएंगे।”
उन्होंने दलालों को चेतावनी देते हुए कहा,
“अगर मेरे घर में दोबारा दलाली करने कोई आए तो मैं केस करूंगी। अगर मेरे घर में फिर से कोई दलाल बनकर आएगा, तो उसके बाद मैं केस करूंगी। हम महिलाएं छेड़छाड़ का केस करेंगी। मैं तो अकेली रहती हूं। मेरे घर में अगर कोई जमीन की बात लेकर आएगा, तो मैं कह दूंगी कि वह मेरे घर छेड़छाड़ करने आया था। मेरा बेटा बाहर रहता है।”बसंती देवी ने कहा कि मुखिया उनकी बात नहीं सुनते। इसलिए अब वे सीधे राजपाल के पास जाएंगी।
“हम राज्यपाल को इनके विरोध में लिखकर देंगे। हम तो पेट की आग से भूखे नहीं मर रहे हैं कि जमीन बेच दें और फिर मजदूरी करें। आखिर किस बात के लिए हम अपनी जमीन दें? जमीन हम क्यों दें?”
ग्रामीणों का कहना है कि बिना बंदोबस्ती और बिना रोजगार के जमीन ली जा रही है। अब वे इस मामले को लेकर जिला प्रशासन से लेकर हाईकोर्ट और राज्यपाल तक लड़ाई लड़ेंगे।
वि ओ :2 पहले भोले-भाले आदिवासियों की जमीन ली, अब पानी भी खत्म कर देंगे”*
आदरडीह में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, डीप बोरिंग और नौकरी को लेकर उठाए सवाल ।
नीमडीह थाना क्षेत्र के आदरडीह पंचायत भवन परिसर में शनिवार देर रात तक चली बैठक में ग्रामीणों ने SM स्टील पावर प्लांट द्वारा जमीन अधिग्रहण और पर्यावरण पर पड़ रहे असर को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी ने सबसे पहले उन्हीं लोगों की जमीन ली जो भोले-भाले थे।
“बुद्धिजीवी का जमीन पहले नहीं लिया। पहले भोला-भाला और जो हम लोग का आदिवासी जमीन है, उसको लिया गया है। यहां सरकार का भी जमीन गया है। नदी गया। फॉरेस्ट का भी जमीन गया। फॉरेस्ट से NOC ले लिया, वो लोग ले रहा है। सरकार का जमीन है भाई, हम लोग क्या करेंगे। लेकिन नदी गया, जंगल गया तो निकासी का क्या होगा?”
डीप बोरिंग से पूरा गांव पानी के लिए तरसेगा बैठक में ग्रामीणों ने कंपनी द्वारा किए गए 300-400 फीट गहरे डीप बोरिंग पर आपत्ति जताई।
“जितना डीप बोरिंग किया है, वो अगर चालू कर देगा तो पूरा गांव पानी के लिए हाहाकार कर जाएगा। पहली बात तो उसको डीप बोरिंग नहीं करना चाहिए था। सुवर्णरेखा से पानी लाना चाहिए था। टाटा स्टील देखिए, रुसूमा देखिए, वो लोग दूसरे जगह से पानी लाते हैं। लेकिन SM स्टील उतना ही बड़ा बन रहा है, फिर भी यहीं बोरिंग खोद दिया।”
नौकरी का कोई लिखित एग्रीमेंट नहीं ग्रामीणों ने कहा कि जमीन के बदले नौकरी और रोजगार का कोई लिखित समझौता नहीं किया गया।
“खाली रसीद दिया कि इतना जमीन गया। हम भी चार एकड़ जमीन दिए हैं। तो दावेदार किसको बनेंगे? नौकरी मांगने जाएं तो लात मार के भगाएगा। एकदम गारंटी के साथ। जो जमीन का दलाली किया वही जानता है। वो लोग फोन कर कहते हैं नौकरी मिलेगी। मिलेगा कैसे? हमको तो कंपनी ने कोई लिखित नहीं दिया।”
ग्रामीणों के अनुसार जमीन का मुआवजा पहले 10 लाख प्रति एकड़ था, फिर 15 लाख और अब 20 लाख दिया जा रहा है।
“20 लाख से ज्यादा किसी को नहीं मिला। लेकिन वो लोग अभी 40 लाख में बेचने की बात कर रहे हैं। हम तो सब गांव वालों से अपील कर रहे हैं कि हम जाएंगे कहेंगे ये जमीन हमने दी है, इसका मुआवजा दीजिए। वो तो लात मार के भगाएगा।”
बैठक में ईचागढ़ के विधायक प्रत्याशी सुखराम हेंब्रम द्वारा सेंदरा करने की दी गई धमकी का भी कड़ा विरोध हुआ।
बाइट: प्रियव्रत कुमार आदारडीह जमीन दाता ने कहा, “यहां सेंदरा नहीं चलेगा। हम लोग क्या जंगली जानवर हैं कि सेंदरा चलेगा? उसको पहले पूछो उसका कितना जमीन गया? उसका बाप का गया है क्या? वो पहले कंपनी का है, अब गांव वालों की तरफ से बोल रहा है। उसको पहले भगाएंगे यहां से। सेंदरा नहीं चलेगा।”ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे हाईकोर्ट और राज्यपाल तक जाएंगे।
जयंत रजक जमीन दाता ने कहा कंपनी का स्वागत है, लेकिन हक-अधिकार चाहिए आदरडीह पंचायत भवन में हुई बैठक के दौरान आदरडीह डेवलपमेंट यूनियन के अधजयंत रजक ने कंपनी, ठेकेदारों और जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यूनियन किसी के विरोध में नहीं है, लेकिन ग्रामीणों के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रहेगी।
थोड़ा महिलाएं आई थीं, वो कह रही थीं कि मेरा जमीन का दलाल लोग घर आ रहा है। वो कह रहे हैं 24 हजार रुपये डिशमिल दिया जाएगा, आप जमीन दे दीजिए।
मोइला का पूरा खेत में पानी भरा हुआ है। पहले तो कंपनी को पानी निकालना चाहिए। वो खेती करेगा और उसके बाद जमीन देगा या नहीं देगा, वो कंपनी का मैटर है। उसमें हम लोग कुछ नहीं बोलेंगे।
जो हम लोग का अभी आदरडीह डेवलपमेंट यूनियन बना है, ये हम लोग का विकास कार्य के लिए बना है। ना हम लोग किसी के विरोध में हैं। आज कंपनी बन रहा है, उनका हम लोग स्वागत करते हैं।
लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हम लोग किसी को अंधे में सपोर्ट भी करेंगे। कोई बाहरी ठेकेदार आकर कुछ भी करके जा रहा है, हम लोग उसमें सपोर्ट नहीं करेंगे। हम लोग सपोर्ट उसमें नहीं करेंगे, लेकिन हमारा अधिकार के लिए हम लोग लड़ाई लड़ रहे हैं। हम लोग को हक-अधिकार चाहिए। जमीन हम लोग का गया है, तो हम लोग को अधिकार चाहिए।”
*स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने का आरोप*
जयंत रजक ने कहा कि कंपनी में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
“आज बाहरी लेबर यहां काम कर रहा है। बाहरी मिस्त्री काम कर रहा है। मेरे गांव में इतने सारे ड्राइवर हैं, फिर भी बाहरी ड्राइवर यहां गाड़ी चला रहा है। आज 40-50 भारी हाईवा चल रहा है यहां। क्यों मेरे सात गांव में एक भी हाईवा नहीं है, एक भी ट्रैक्टर नहीं है? कंपनी क्यों नहीं ले रहा है?”
उन्होंने विधायक प्रत्याशी सुखराम हेंब्रम के बयान पर भी आपत्ति जताई।
“सुखरामदा बोल रहे हैं कि यूएन कोई सपोर्ट कर रहा है। ये कौन सा भाषा बोल रहा है सुखरामदा? ऐसा भाषा उनको नहीं बोलना चाहिए। देखिए, हम लोग डरे हुए नहीं हैं। लेकिन हम लोग बदनामी से थोड़ा डरते हैं। बम, बंदूक, गोली, कुछ भी से हम लोग नहीं डरते हैं, क्योंकि हम लोग गलत काम में नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि यूनियन गांव के विकास के लिए बनाई गई है।
“हम लोग एक यूनियन बना रहे हैं, डेवलप के लिए। गांव को डेवलप करने के लिए। इसका नामकरण भी किया है – आदरडीह डेवलपमेंट यूनियन। इसमें डरने वाली कोई बात नहीं है।
पहले 5-6 आदमी मिलकर एक-दो संगठन बना था। उसी लोग के देखरेख में कंपनी चल रहा था। बीच में कोई ठेकेदार आया, काम को लेकर भड़जोड़ हुआ, मारपीट हुई। उसमें दोषी कौन है? वही लोग दोषी हैं, आज हम लोग यूनियन बनाए तो हम लोग दोषी हैं?
वो जो ठेकेदार बाहर का आया है, हम लोग ठेकेदार को नहीं लाए हैं। कंपनी लाई है। फिर हम लोग पर इल्जाम लगा रहे हैं कि संगठन बनाए तो वही लोग संरक्षण दे रहा है। हम लोग किसी ठेकेदार का संरक्षण नहीं देंगे।
हां, कंपनी बन रहा है, हम लोग स्वागत करते हैं। विरोध में नहीं जाएंगे। लेकिन हम लोग जमीन दाता के साथ खड़े हैं और मरते दम तक रहेंगे।
सुखरामदा जानते होंगे कौन बाहर का है और कौन अंदर का है। जो मीटिंग रखा गया है तो सुखरामदा भी जानेंगे। हम लोग को तो ऐसी जानकारी नहीं है। और हम लोग किसी को ना सपोर्ट करते हैं, ना विरोध करते हैं।”
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