
सरायकेला : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के तहत बने चांडिल बांध के बढ़ते जलस्तर को लेकर वेव न्यूज़ द्वारा लगातार उठाए जा रहे मुद्दे का असर अब दिखने लगा है। पहले जहां सिर्फ 4 फाटक 20-20 सेमी खोले जा रहे थे, वहीं अब बांध के 5 फाटक खोल दिए गए हैं। इससे पानी की निकासी बढ़ी है और जलस्तर नियंत्रण में है।
वर्तमान में बांध के 4 फाटक 20/20 सेंटी मीटर रेडियल खोला गया और सुलूस

गेट दो एक मीटर एंबी 55 सेंटीमीटर खोला गया।

माघ गेट बालू निकासी दो 15 सेंटीमीटर तक खोला गया है। चांडिल बांध से प्रभावित 116 गांवों के 84 मौजा विस्थापितों की ओर से विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कशिश न्यूज़ का आभार जताया है।
उन्होंने कहा कि मीडिया की सक्रियता से प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे पर गया और समय पर फाटक खोलने का निर्णय लिया गया।
राकेश रंजन महतो, अध्यक्ष, विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन ।
कल बांध का जलस्तर 179.25 मीटर था, आज 179.30 मीटर के आसपास है। यानी जलस्तर घटा नहीं है, सिर्फ नियंत्रित है। लगातार बारिश के कारण आने वाले दिनों में जलस्तर बढ़ सकता है। चांडिल बांध का जलग्रहण क्षेत्र रांची, पश्चिम बंगाल समेत काफी बड़ा है। सिर्फ स्थानीय बारिश देखकर निर्णय लेना ठीक नहीं होगा। पूरे जलग्रहण क्षेत्र, मौसम विभाग के पूर्वानुमान और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर समय पर फाटक खोलने चाहिए।
राकेश महतो ने विभाग से आग्रह किया कि जरूरत पड़ने पर फाटक और खोले जाएं, ताकि 116 विस्थापित गांवों के साथ-साथ जमशेदपुर और सुवर्णरेखा किनारे बसे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों को अचानक बाढ़ की स्थिति से बचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि जनहित और जनसुरक्षा के लिए यह मुद्दा उठा रहा है। बांध प्रबंधन पारदर्शी और दूरदर्शी होना चाहिए।
इस बीच चांडिल डैम पर पर्यटकों की भीड़ देखी गई। स्थानीय लोग शैलपी एब और आसपास जाल से मछली मारते नजर आए।
विस्थापितों ने प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में भी मौसम और जलप्रवाह का आकलन कर समय पर निर्णय लिए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि से बचा जा सके।चांडिल डैम के रेडियल गेट खोले जाने से स्थानीय ग्रामीण एवं पर्यटकों का भीड़ उमड़ने लगा ।लोगो ने मछली मारने पहुंचे कोई लोग मछली मारे ।
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