
सरायकेला: – सरायकेला स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में सोमवार को देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जगन्नाथ महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ।
नगर और आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने इस पवित्र अनुष्ठान में पहुंचकर फूल प्रसाद भोग लगाकर पूजा अर्चना तथा आरती स्वयं को धन्य महसूस किया।
परंपरा के अनुसार, प्रातः काल से ही मंदिर में अनुष्ठान शुरू हो गए थे। इस अनुष्ठान में पुजारी सानू आचार्य, ब्रह्मा देव महापात्र , सुमित महापात्र ने विधि-विधान के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को ‘स्नान मांडप’ पर विराजमान कराया। इसके पश्चात, साथ पवित्र जलाशयों से एकत्रित जल से भगवान का महास्नान कराया गया। इस अलौकिक दृश्य को देखकर पूरा मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंज उठा।
“यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। सरायकेला में इसे लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।” — लिपू मांहती, श्री जगरनाथ सेवा समिति, अध्यक्ष
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अत्यधिक स्नान के कारण भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ गए हैं। इस अवधि को ‘अनासार’ (अनसर) कहा जाता है। अगले 15 दिनों तक भगवान मंदिर के एक विशेष कक्ष में विश्राम करेंगे और उन्हें पारंपरिक जड़ी-बूटियों व औषधियों का उपचार दिया जाएगा।
अनासार अवधि के दौरान आम भक्तों के लिए गर्भगृह के द्वार बंद रहेंगे।
भगवान को सेवायतों द्वारा औषधीय लेप और काढ़ा दिया जाएगा।
15 दिनों की इस विश्राम अवधि के पश्चात, भगवान स्वस्थ होकर रथ यात्रा (गुंडीचा यात्रा) के लिए बाहर आएंगे।
इस महोत्सव के शुभारंभ के साथ ही सरायकेला में भक्तिमय वातावरण छा गया है। रथ यात्रा की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं।
मौके पर उपस्थित राजा सिंह देव, सचिव शंकर सतपति, एवं समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
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