
*चाईबासा* : पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी पहल “प्रोजेक्ट जागृति” के अंतर्गत आज सदर अस्पताल, चाईबासा परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान, जनस्वास्थ्य जागरूकता तथा सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मौहम्मद शाकिर, उपायुक्त श्री मनीष कुमार तथा पुलिस अधीक्षक श्री अमित रेनू ने संयुक्त रूप से उपस्थित होकर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया तथा रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी, डालसा सचिव श्री रवि चौधरी, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी सुश्री श्रुति राजलक्ष्मी, सदर चाईबासा अनुमंडल पदाधिकारी श्री संजय कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री टोनी प्रेमराज टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, स्वयंसेवी संगठन के प्रतिनिधि, युवा वर्ग एवं नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दिया। रक्तदान शिविर में प्राप्त रक्त इकाइयाँ भविष्य में दुर्घटना, प्रसव, गंभीर बीमारी, थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों के उपचार हेतु उपयोगी सिद्ध होंगी। उपस्थित पदाधिकारियों ने रक्तदाताओं को समाज के वास्तविक नायक बताते हुए कहा कि उनका यह योगदान अनेक लोगों के जीवन को बचाने में सहायक बनेगा। रक्तदान करने वाले सभी “रक्तवीरों” को उनके मानवीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र, टी-शर्ट एवं कॉफी मग प्रदान कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सम्मानित रक्तदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनका यह कार्य समाज में सेवा, सहयोग और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला है। साथ ही युवाओं एवं आम नागरिकों से नियमित अंतराल पर स्वैच्छिक रक्तदान करने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मौहम्मद शाकिर ने कहा कि रक्तदान केवल एक चिकित्सीय आवश्यकता की पूर्ति नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान कई परिवारों के जीवन में आशा और खुशियाँ ला सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में सेवा, करुणा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि रक्तदान को सामाजिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाए ताकि किसी भी मरीज को रक्त के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े।

उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट जागृति का उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना तथा जनसहभागिता को सशक्त करना है। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा महादान है, जिसका लाभ सीधे किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन की रक्षा के रूप में सामने आता है। उन्होंने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक अभियानों को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उपायुक्त ने कहा कि रक्तदान शिविरों के माध्यम से जिले में सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। उन्होंने सभी स्वयंसेवी संगठनों, स्वास्थ्यकर्मियों, रक्तदाताओं एवं आयोजन से जुड़े सभी व्यक्तियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन और समाज के सामूहिक प्रयास से ही स्वस्थ एवं जागरूक समाज का निर्माण संभव है।
पुलिस अधीक्षक श्री अमित रेनू ने कहा कि रक्तदान समाज के प्रति हमारी संवेदनशीलता, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचायक है। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग में रक्तदान के प्रति बढ़ती जागरूकता एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने युवाओं को नियमित रूप से रक्तदान करने, नशामुक्त जीवन अपनाने तथा समाजहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक एकजुटता एवं मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
*टीबी मरीजों के बीच फुड बास्केट का वितरण*
इस अवसर पर निक्षय मित्र अभियान के अंतर्गत गोद लिए गए 91 टीबी मरीजों के बीच द्वितीय माह का पोषाहार पैकेट वितरित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने टीबी उन्मूलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि उपचार के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी मरीजों के स्वास्थ्य लाभ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निक्षय मित्रों द्वारा प्रदान की जा रही सहायता न केवल मरीजों के पोषण स्तर में सुधार ला रही है, बल्कि उनके मनोबल को भी बढ़ाने का कार्य कर रही है। इसी क्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री टोनी प्रेमराज टोप्पो द्वारा पाँच नए टीबी मरीजों को गोद लेते हुए उनके बीच पोषण सामग्री का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम एवं जागरूक नागरिकों को निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए, ताकि वर्ष 2027 तक टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में प्रभावी प्रगति सुनिश्चित की जा सके। ज्ञात हो कि निक्षय मित्र के द्वारा 6 माह तक गोद लिए गए टीबी मरीजों को पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।
कार्यक्रम के उपरांत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य अधिकारियों द्वारा सदर अस्पताल स्थित महिला वार्ड का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं, मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लिया गया। पदाधिकारियों ने भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों से संवाद कर अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक सुझाव दिए।
*भर्ती मरीजों को मरीज यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था का शुभारंभ और नवजात शिशुओं को जन्म प्रमाणपत्र जारी*
निरीक्षण के क्रम में अस्पताल प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में भर्ती मरीजों को मरीज यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य अस्पताल में भर्ती मरीजों की पहचान को सुव्यवस्थित करना, संक्रमण नियंत्रण को बेहतर बनाना, स्वच्छता मानकों को सुदृढ़ करना तथा मरीजों को गरिमापूर्ण एवं समान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। पदाधिकारियों ने इस नवाचार को मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि इससे अस्पताल प्रबंधन और मरीजों दोनों को लाभ प्राप्त होगा। इसके साथ ही 3 नवजात शिशुओं का जन्म प्रमाण पत्र जारी करते हुए परिवारजन को उपलब्ध कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की सुविधा, रक्तदान को बढ़ावा देने, टीबी उन्मूलन अभियान को गति प्रदान करने तथा समाज में जनसहभागिता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की भी जानकारी साझा की गई। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता तथा जनहित के अभियानों में बढ़-चढ़कर भाग लें और एक स्वस्थ, जागरूक एवं संवेदनशील समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। कार्यक्रम के अंत में पश्चिमी सिंहभूम को नशामुक्त जिला बनाने का संकल्प लिया गया।
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