
: चांडिल वन क्षेत्र के अधीन ईचागढ़ प्रखंड के मौसाढ़ा गांव में मंगलवार रात हाथी-मानव संघर्ष की घटना में एक महिला बुरी तरह घायल हो गई। घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
*सोते परिवार पर टूट पड़ा हाथियों का झुंड* ग्रामीणों के अनुसार, भोजन-पानी की तलाश में हाथियों का झुंड मंगलवार रात गांव पहुंच गया। सोए हुए परिवार को पता ही नहीं चला कि कब हाथी घरों पर आक्रमण कर देंगे। हाथियों ने एक घर की दीवार तोड़ दी और घर का मलबा गिरने से महिला मलबे में दबकर बुरी तरह घायल हो गई। ग्रामीणों ने किसी तरह उसे निकालकर इलाज के लिए भेजा।

तिरुलडीह सुवर्णरेखा नदी में कोई जगह पर बालू खनन धड़ल्ले से चल रहा जिसे हाथी भटक कर गांव में लगातार संघर्ष से अस्त-व्यस्त जनजीवन। लगातार हो रहे हाथी-मानव संघर्ष से क्षेत्र का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को सूचना देने के बाद भी घटना स्थल पर कोई अधिकारी-कर्मी नहीं पहुंचा और न ही हाथी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग मौन है और सरकार सिर्फ मैया योजना में व्यस्त है।

*वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल* घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हाथी को खदेड़ने की बजाय सरकार ‘हाथी भेजकर कुचलने का काम कर रही है’। लोगों का मानना है कि समय पर सूचना और निगरानी होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावित महिला को मुआवजा, बेहतर चिकित्सा और गांव में हाथी भगाने की स्थायी व्यवस्था की मांग की है।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
