
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बहस और सवालों का दौर जारी है। घटना के बाद बिहार पुलिस के आधिकारिक फेसबुक पेज पर किए गए एक पोस्ट को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का दावा है कि पोस्ट में उल्लेख किया गया था कि भरत तिवारी पुलिस टीम पर रुक-रुक कर फायरिंग कर रहा था, जिसके कारण किसी बड़ी जान-माल की हानि को रोकने के लिए उसके पैर में गोली मारी गई। हालांकि बाद में उक्त पोस्ट दिखाई नहीं देने पर लोगों ने इसे लेकर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

वहीं, दूसरी ओर वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के आधार पर कई लोग यह सवाल कर रहे हैं कि यदि आरोपी ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, तो फिर गोली चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो में कथित तौर पर पुलिस और युवक के बीच बातचीत दिखाई दे रही है, जिसमें उसकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सरकार और पुलिस प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई।
फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। क्या आत्मसमर्पण के बाद कार्रवाई हुई या फिर मुठभेड़ की परिस्थितियां कुछ और थीं? वायरल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और पुलिस के आधिकारिक बयान के बीच सच्चाई क्या है, इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। तब तक भरत तिवारी एनकाउंटर का यह मामला लोगों के बीच चर्चा और सस्पेंस का विषय बना हुआ है।
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