
*गोविंदपुर, धनबाद*
पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर जियलगढ़ा पंचायत कगालो में श्रीमद् भागवत कथा आध्यात्मिक समिति द्वारा सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। वृंदावन से पधारे कथावाचक श्री ललित वल्लभ नागाचार्य के मुखारविंद से कथा सरल, सुगम और प्रेमपूर्वक जन-जन तक पहुंच रही है। श्रद्धालु भक्ति भाव से कथा का रसास्वादन कर रहे हैं और पंडाल में उत्सव का माहौल है।

*व्यवस्था में जुटे समिति सदस्य*

आध्यात्मिक समिति के मुख्य अजमान रामप्रसाद कुंभकार ‘बबलू’ एवं उनकी धर्मपत्नी पूर्णिमा देवी के नेतृत्व में सभी सदस्य सक्रिय हैं। नयन कुमार मिश्रा, डॉक्टर तारा पद कुंभकार, किशोर राय, उमाकांत वर्मा, बैधनाथ कुंभकार, शरद कुमार, कन्हाई कुमार, कार्तिक कुमार, बुद्धदेव कुमार, भीम कुमार आदि श्रद्धालुओं की व्यवस्था में तत्परता से लगे हुए हैं।
*जनप्रतिनिधियों ने लिया आशीर्वाद*
गोविंदपुर प्रखंड की प्रमुख निर्मला सिंह, पूर्व उपप्रमुख डीएन सिंह, पूर्व मुखिया सुभाष गिरि एवं मुखिया पति नितेश गोप ने कथा पंडाल पहुंचकर कथावाचक श्री ललित वल्लभ नागाचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया।
*पत्रकारों का सम्मान*
द्वितीय दिवस पर कथावाचक नागाचार्य जी ने व्यास पीठ से पत्रकार बंधुओं चंचल गोस्वामी, उमेश गिरि सहित अन्य को बुलाकर आशीर्वाद एवं सम्मान दिया।
*आज की कथा का मुख्य सारांश: धुंधली और धुंधकारी प्रसंग*
आज कथा पंडाल में श्रद्धालु भक्ति भाव से तालियों के साथ झूमते नजर आए। आज की कथा में ‘धुंधकारी मोक्ष’ प्रसंग सुनाया गया, जिसका सारांश यह है:
– *आत्मदेव और धुंधली*: विद्वान ब्राह्मण आत्मदेव की पत्नी धुंधली को संतान नहीं थी। संन्यासी से मिले फल को डर के कारण उसने अपनी बहन को खिला दिया और खुद गर्भवती होने का नाटक किया।
– *धुंधकारी का जन्म*: बहन के पुत्र को अपना बताकर उसका नाम धुंधकारी रखा। धुंधकारी बचपन से ही क्रोधी, हिंसक और दुराचारी निकला।
– *पाप और पतन*: युवा होकर धुंधकारी वेश्याओं की संगति में पड़ गया। उसने माता-पिता की संपत्ति उड़ा दी। दुखी होकर आत्मदेव वन चले गए और धुंधली ने कुएं में कूदकर जान दे दी। बाद में वेश्याओं ने ही धन के लालच में धुंधकारी को मार डाला।
– *प्रेत योनि*: भीषण कुकर्मों के कारण धुंधकारी मृत्यु के बाद प्रेत बनकर भटकने लगा।
– *गोकर्ण और मुक्ति*: आत्मदेव का दूसरा पुत्र गोकर्ण परम ज्ञानी और संत था। भाई की दुर्गति देखकर गोकर्ण ने पितरों की मुक्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। सात दिनों तक भागवत श्रवण के प्रताप से धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई।
*कथा का संदेश*: यह प्रसंग दर्शाता है कि कितना भी बड़ा पापी क्यों न हो, सच्चे मन से श्रीमद्भागवत कथा श्रवण और सत्संग से उसका उद्धार संभव है। भक्ति और ज्ञान से प्रेत योनि से भी मुक्ति मिलती है।
कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
*रिपोर्ट: चंचल गोस्वामी, उमेश गिरि*
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