
आजसू युवा मोर्चा के प्रदेश संयोजक दीपक पांडेय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि अगर जल्द ही इन गलत फैसलों को वापस नहीं लिया गया, तो छात्र और युवा आजसू एक जोरदार आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
दीपक पांडेय ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मुख्य रूप से (VC) के आने के बाद से लगातार अपने पद का दुरुपयोग किया जा

आजसू नेता दीपक पांडेय ने साफ कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी मनमानी बंद करे और छात्रों के हित में फैसले ले। अगर यूनिवर्सिटी प्रबंधन अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं । आजसू युवा मोर्चा जोरदार आंदोलन के लिए बाध्य होगा Jamshedpur Women’s University में नई कुलपति डॉ. ऐला कुमार के पदभार संभालने के बाद से विश्वविद्यालय में कई प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पारदर्शिता, नियुक्ति प्रक्रिया, PhD जांच और अब विभागों को बंद करने की प्रक्रिया पर भी विश्वविद्यालय परिवार जवाब मांग रहा है।

“नई कुलपति डॉ. ऐला कुमार के आते ही स्वनियुक्त कर्मचारियों को यह कहकर हटाया जाने लगा कि ‘राज्यभवन का आदेश’ है। यदि वास्तव में राज्यभवन के आदेशों का पालन ही प्रशासन की प्राथमिकता है, तो फिर वर्ष 2024 में जारी उस आदेश का क्या हुआ, जिसमें B.Ed एवं M.Ed विभाग के अनुबंध शिक्षकों की नियुक्तियों और उनकी PhD डिग्रियों की जांच करने को कहा गया था?
विश्वविद्यालय परिवार जानना चाहता है कि आखिर उस जांच की फाइल आज तक आगे क्यों नहीं बढ़ी?
क्या नियम केवल कमजोर कर्मचारियों पर लागू होंगे? क्या प्रभावशाली लोगों और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था है?
वर्तमान कुलसचिव अनुपूरण झा, जो पहले CVCC के पद पर थीं, उनके कार्यकाल में हुई नियुक्तियों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कितनी नियुक्तियाँ हुईं? किन प्रक्रियाओं के तहत हुईं? क्या विज्ञापन, मेरिट और आरक्षण नियमों का सही पालन हुआ था या सब कुछ बंद कमरों में तय होता रहा?
विश्वविद्यालय की जनता यह भी जानना चाहती है कि कई स्थायी एवं अनुबंध शिक्षक बिना किसी अध्ययन अवकाश (Study Leave) या स्पष्ट विभागीय अनुमति के PhD कैसे कर लेते हैं या कर रहे हैं? यदि कोई शिक्षक नियमित सेवा में रहते हुए शोध कर रहा था, तो उसकी उपस्थिति, सेवा दायित्व और शोध प्रक्रिया की जांच कब होगी?
अब नया सवाल क्लस्टर व्यवस्था को लेकर भी उठ रहा है। जिस प्रकार कम विद्यार्थियों का हवाला देकर कुछ विषयों को बंद किया जा रहा है और संबंधित शिक्षकों को दूसरे विश्वविद्यालय या महाविद्यालय भेजने की तैयारी हो रही है, क्या यह नियम विश्वविद्यालय के सभी कम छात्र संख्या वाले विभागों पर समान रूप से लागू होगा?
या फिर कार्रवाई केवल चुनिंदा विभागों और शिक्षकों तक सीमित रहेगी?
क्या जो लोग कुलपति और प्रशासनिक संरक्षण में हैं, वे बचा लिए जाएंगे जबकि अन्य शिक्षकों को स्थानांतरण और विभाग बंदी का सामना करना पड़ेगा?
विश्वविद्यालय प्रशासन स्पष्ट करे कि कम छात्र संख्या तय करने का मापदंड क्या है? कितने छात्रों पर विभाग बंद होगा? कौन-सी समिति ने यह निर्णय लिया? और क्या यह नियम हर विभाग पर समान रूप से लागू किया जाएगा?
यदि विश्वविद्यालय में सुधार की बात की जा रही है, तो सुधार चयनात्मक नहीं हो सकता।
हर नियुक्ति की जांच हो, हर संदिग्ध PhD की जांच हो, हर विभाग पर समान नियम लागू हों और हर प्रशासनिक निर्णय सार्वजनिक हो।
क्योंकि विश्वविद्यालय व्यक्तिगत संरक्षण से नहीं, निष्पक्ष नीति और पारदर्शी प्रशासन से चलता है।
अब विश्वविद्यालय परिवार भाषण नहीं, स्पष्ट जवाब चाहता है —
जांच कब होगी?
कार्रवाई किन पर होगी?
और नियम आखिर सब पर समान रूप से लागू होंगे या नहीं?”
जल्द इस पर वि वि प्रशासन कोई सख्त कदम उठाए ओर यहाँ हो रहे खेल को बंद करे अन्यथा वि वि में युवा आजसू ओर छात्र संघ तालाबंदी का कार्यक्रम होगा
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