
हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में हजारीबाग जिला क्रिकेट एसोसिएशन की कार्यशैली, सदस्यता प्रक्रिया, खिलाड़ियों की उपेक्षा तथा हाल के विवादों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
इस दौरान उन्होंने इशारों ही इशारों में राजनीतिक विरोधियों और एचडीसीए के पदाधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग कहलाना तो राम चाहते हैं, लेकिन भूमिका धृतराष्ट्र की निभा रहे हैं। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि हजारीबाग के विकास, खिलाड़ियों के सम्मान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए यदि उन्हें उदंड कहा जाता है, तो वे एक नहीं बल्कि हजार बार भी ऐसी उदंडता करने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि जनता की आवाज उठाना, आत्मसम्मान की रक्षा करना और खेल व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब टाटा स्टील के साथ आयोजित दोस्ताना क्रिकेट मैच में बिना उनकी सहमति के उनके नाम का उपयोग किया गया। विधायक ने कहा कि यदि उनके नाम का उपयोग किया गया था तो उन्हें इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई और इसके पीछे मंशा क्या थी। उन्होंने कहा कि उनका सवाल केवल इतना था कि बिना जानकारी और सहमति के किसी जनप्रतिनिधि के नाम का इस्तेमाल क्यों किया गया। विधायक ने कहा कि जब उन्होंने इस विषय पर सवाल उठाया तो उनके प्रयास को अनैतिक और उद्दंड बताया गया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने की कोशिश को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। विधायक ने कहा कि जब उन्होंने विरोध दर्ज कराया तो एचडीसीए के सचिव, कार्यकारी अध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य स्वयं आकर अपनी गलती स्वीकार करते हैं।

लेकिन इसके तुरंत बाद सांसद द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम सामान्य नहीं प्रतीत होता। प्रदीप प्रसाद ने कहा कि उनका विरोध केवल एचडीसीए सचिव की कार्यशैली को लेकर था, लेकिन सांसद स्वयं उड़ता तीर लेकर बचाव में उतर आए। उन्होंने कहा कि चेयरपर्सन होने का हवाला देकर जिस तरह से बचाव किया गया, उससे यह स्पष्ट होता है कि संगठन पर कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव हावी है। उन्होंने कहा कि एचडीसीए सचिव द्वारा यह दावा किया गया कि उन्हें कार्यक्रम की सूचना दी गई थी, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्हें संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप में तक शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में सूचना भेजने का दावा पूरी तरह निराधार और भ्रामक है। विधायक ने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि हजारीबाग की उस जनता का भी अपमान है जिसने उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपना प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा भेजा है।
विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि हजारीबाग क्रिकेट एसोसिएशन किसी की बपौती नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि वे स्वयं एक साधारण शिक्षक के पुत्र हैं और इतना बड़ा स्टेडियम किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं हो सकता। स्टेडियम हजारीबाग की जनता का है और उसका संचालन भी लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने एचडीसीए की सदस्यता प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि वर्ष 1968 से संगठन अस्तित्व में है, लेकिन आज तक सदस्य संख्या लगभग 102 तक ही सीमित क्यों है। आखिर नए खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और शहर के युवाओं के लिए सदस्यता के द्वार क्यों नहीं खोले जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपना व्यक्तिगत वर्चस्व बनाए रखने के लिए नए सदस्यों को संगठन से दूर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने आजीवन सदस्य बनने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सदस्यता नहीं दी गई। विधायक ने कहा कि आखिर किसके इशारे पर ऐसे लोगों को संगठन से बाहर रखा गया।
उन्होंने आगे कहा कि क्या कुछ चुनिंदा लोग ही हजारीबाग क्रिकेट का भविष्य तय करेंगे और आम लोगों को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जाएगा। स्टेडियम के नामकरण को लेकर भी विधायक ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हजारीबाग क्रिकेट को खड़ा करने में स्वर्गीय विभूति सिंह और “बाजू दा” जैसे लोगों का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दिनों में ऐसे लोगों ने स्वयं स्कूटर पर मैट ढोकर क्रिकेट को जीवित रखा, लेकिन आज उनके योगदान को भुला दिया गया।
प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यदि उनमें खेल भावना की कमी होती तो वे किसी भी हाल में उक्त मैच का आयोजन नहीं होने देते, लेकिन उन्होंने खेल और खिलाड़ियों के सम्मान में विरोध दर्ज कराने के बाद स्वयं पीछे हटना उचित समझा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी खेल भावना पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान विधायक ने कहा कि वे कल भी लक्ष्मण थे, आज भी लक्ष्मण है और आगे भी रहेंगे, लेकिन स्वयं को राम कहलाना चाहते हैं, लेकिन उनकी भूमिका धृतराष्ट्र जैसी दिखाई देती है।उन्होंने एचडीसीए के संचालन को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन का अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति है
जो हजारीबाग में स्थायी रूप से रहते तक नहीं हैं और पूरा संचालन कार्यकारी अध्यक्ष के भरोसे चल रहा है। विधायक ने कहा कि इससे यह धारणा मजबूत होती है कि संगठन कुछ विशेष लोगों के प्रभाव में संचालित हो रहा है। विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि वे हजारीबाग के विकास, खिलाड़ियों के हित, खेल संस्कृति के विस्तार और जनता के सम्मान के लिए हमेशा मजबूती से खड़े है।
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