

सरायकेला : आदिवासी भूमिज मुंडा चुआड़ सेना, झारखंड के एक प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड लोकभवन में राज्यपाल से मुलाकात कर भूमिज समाज की आपत्तियों एवं भावनाओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. जगदीश चंद्र झा की पुस्तक “भूमिज रिवॉल्ट” भी राज्यपाल को भेंट की।

प्रतिनिधिमंडल में मानिक सिंह सरदार, रामू सरदार, निर्मल सरदार, मनिका भूमिज, निवारण सरदार, पार्वती सरदार, सागर सरदार, हरा सरदार एवं विभूति सरदार शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल की ओर से मानिक सिंह सरदार ने कहा कि 13 मई 2026 को पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो द्वारा रघुनाथ महतो की प्रतिमा राज्यपाल को भेंट करने तथा लोकभवन में माल्यार्पण करने का कदम दुर्भाग्यपूर्ण एवं भूमिज समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिविल कोर्ट, रांची में विचाराधीन है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से प्रतिमा भेंट करना न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी है और इससे समाज में अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो सकता है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि आदिवासी भूमिज समाज रघुनाथ महतो को अपना पूर्वज और चुआड़ विद्रोह का नायक नहीं मानता। भूमिज समाज के अनुसार, चुआड़ विद्रोह का नेतृत्व भूमिज सरदारों ने किया था और रघुनाथ महतो को जबरन इस आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि इतिहास के तथ्यों से छेड़छाड़ कर भूमिज समाज की पहचान और शहादत को नजरअंदाज किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक रघुनाथ महतो से जुड़ी किसी भी सरकारी गतिविधि, प्रतिमा स्थापना या सम्मान कार्यक्रम पर रोक लगाई जाए। साथ ही डॉ. जगदीश चंद्र झा की पुस्तक “भूमिज रिवॉल्ट” सहित अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर चुआड़ विद्रोह के वास्तविक नायकों पर शोध कर सच्चाई सामने लाई जाए।
राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे। सभी ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन कर ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि रघुनाथ महतोन की पहचान को लेकर भूमिज और महतो समाज के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। दोनों समुदाय उन्हें अपना नायक बताते हैं। मामला कोर्ट में होने के बावजूद सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रतिमा भेंट करने से विवाद और गहरा गया है।
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