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माननीयों की होड़ में झरिया बेहाल: कहीं खुशी की लहर, तो कहीं वादों का ‘सूखा’

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May 14, 2026
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सनी शर्मा

धनबाद: कोयलांचल की राजनीति में इन दिनों ‘पावर गेम’ का ऐसा तड़का लगा है कि जनता पशोपेश में है। मामला ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ वाला नजर आ रहा है। एक तरफ मेयर साहब का शक्ति प्रदर्शन, तो दूसरी तरफ सांसद महोदय का भव्य अभिनंदन। लेकिन इस पूरी चमक-धमक के बीच झरिया की जनता खुद को ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’ जैसा महसूस कर रही है।

फ्लैशबैक: जब कतरास में बरसा ‘फूलों का पानी’

बीती 13 अप्रैल को कतरास की गलियां गवाह बनीं जब धनबाद के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह ने अपनी ‘आभार यात्रा’ निकाली। जनसैलाब ऐसा कि तिल रखने की जगह नहीं। फूलों की ऐसी वर्षा हुई मानो झरिया-धनबाद की सारी समस्याएं उसी दिन बह गई हों। इसे सांसद के गढ़ में सेंधमारी कहें या जनता का प्यार, लेकिन इसने सियासी गलियारों में ‘खलबली’ जरूर मचा दी।

ताजा मंजर: झरिया की धूप और ‘भाषणों की बारिश’

ठीक एक महीने बाद, यानी 14 मई को बारी थी सांसद ढुल्लू महतो के सम्मान समारोह की। झरिया के मुख्य मार्ग पर भारी जनसैलाब उमड़ा। चिलचिलाती धूप में लोग इस उम्मीद में टिके रहे कि शायद सांसद महोदय के पिटारे से झरिया के लिए ‘अमृत’ की कुछ बूंदें (बिजली, पानी, सड़क) गिरेंगी।
“उम्मीद पे दुनिया कायम है, पर यहाँ तो सिर्फ भाषण ही लायक है!”

चर्चाओं का बाजार: ‘मुद्दा गया तेल लेने, पावर दिखाओ खुल के’

झरिया की जनता को उम्मीद थी कि सांसद जी बदहाल बिजली, सड़कों के गड्ढे, प्यासा हलक और प्रदूषण के ‘जहर’ पर कुछ बोलेंगे। लेकिन हुआ इसके उलट! भाषण में पुरानी हत्याओं का जिक्र हुआ, रणधीर वर्मा चौक पर पुतला दहन की कहानियाँ चलीं, धनबाद के विकास के कसीदे पढ़े गए।
लेकिन झरिया के जन सुविधाओं और प्रदूषण पर ऐसी चुप्पी रही, जैसे ‘सांप सूंघ गया हो’। स्थानीय लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि “सांसद महोदय शायद भूगोल भूल गए थे, तैयारी धनबाद की थी और मंच झरिया में सज गया!”

फिलहाल धनबाद की राजनीति में ‘एक म्यान में दो तलवारें’ वाला हाल है। पावर गेम के इस शोर में जनता के बुनियादी सवाल ‘नक्कारखाने में तूती की आवाज’ बनकर रह गए हैं। देखना यह है कि यह ‘सम्मान की लड़ाई’ जनता के ‘समाधान’ तक पहुँचती है या फिर ‘ऊपर से फिट-फाट, अंदर से मोकामा घाट’ वाली कहावत ही चरितार्थ होती रहेगी।

हाले बयान झरिया : नेता जी का स्वागत जोरदार, पर जनता की झोली मे अब भी है उधार!


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