
सरायकेला : कुकड़ू में करंट लगने से हुई जंगली हाथी की मौत के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। वही जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने घटना पर दुख जताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


*’जांच कब, कार्रवाई कब?’:*
हालांकि इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर दोषियों की जांच कब शुरू होगी और मानव-हाथी संघर्ष के असली जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होगी। दो दिन पहले ही कुकड़ू में हाथी के हमले से मुनिराम गोराई की मौत हुई थी।
मुनिराम गोराई की मौत के बाद कुछ बालू माफियाओं ने वन अधिकारियों को घेरकर दबाव बनाया था। मृतक की लाश को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया गया था। अब हाथी की मौत पर समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछा जा रहा है कि इस अबला जीव की मौत का असली जिम्मेदार कौन है..?
*’क्या हाथी की लाश पर भी होगी राजनीति?’:*
लोगों का कहना है कि क्या आज वन विभाग भी हाथी को सड़क पर लाकर उसकी लाश पर राजनीति करेगा? क्या उसी तरह दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग उठेगी जैसी इंसान की मौत पर उठाई गई थी?
*अवैध बालू और करंट तार जिम्मेदार कौन :*
मृत हाथी के ठीक सामने अवैध बालू का कारोबार चल रहा था। आशंका है कि बालू माफियाओं ने हाथियों को भगाने के लिए अवैध रूप से बिजली का नंगा तार लगाया था, जिसकी चपेट में आने से हाथी की मौत हुई। सवाल है कि अवैध बालू चलाने वालों और बिजली का तार बिछाने वालों की जिम्मेदारी कब तय होगी..?
*’श्रद्धांजलि से मुक्ति नहीं’:*
वन्यजीव प्रेमियों ने कहा कि सिर्फ मृत हाथी के शव के सामने अगरबत्ती जलाने और श्रद्धांजलि देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। जब तक कॉरिडोर से अवैध बालू भंडारण, अतिक्रमण और अवैध बिजली कनेक्शन नहीं हटाए जाते, तब तक मानव-हाथी संघर्ष रुकने वाला नहीं है।
डीएफओ ने कहा कि एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। बिजली विभाग और खनन विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।
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