

गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम आते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय में जश्न का माहौल छा गया। पार्टी ने हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर हैट्रिक का लक्ष्य पूरा कर लिया है। प्रारंभिक रुझानों और उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा गठबंधन स्पष्ट बहुमत के साथ आगे चल रहा है, जबकि कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

चुनावी नतीजों में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस के लिए जोरहाट सीट से आया, जहां पार्टी के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार गौरव गोगोई हार गए। राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले गोगोई को असम कांग्रेस का चेहरा बनाया गया था, लेकिन स्थानीय मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोगोई की असमिया भाषा पर कमजोर पकड़ और असमिया अस्मिता से दूरी उनके हार का प्रमुख कारण बनी। असम के मूल निवासियों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की कमी ने कांग्रेस की रणनीति को ध्वस्त कर दिया।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की लोकप्रियता एक बार फिर साबित हुई। विकास कार्यों, युवा-केंद्रित योजनाओं, रोजगार सृजन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उनके एजेंडे ने जनता का विश्वास जीता। सरमा सरकार ने पिछले कार्यकाल में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की थी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और स्टार्टअप इंसेंटिव ने भाजपा की पकड़ को और मजबूत किया।
भाजपा की स्थिति पहले से अधिक मजबूत
2021 के चुनाव की तुलना में भाजपा की स्थिति इस बार और मजबूत नजर आई। पार्टी ने न केवल अपनी पारंपरिक सीटों पर कब्जा बरकरार रखा बल्कि कई नई सीटों पर भी जीत दर्ज की। गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद (AGP) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के साथ मिलकर भाजपा ने लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों—ऊपरी असम, निचले असम और बराक घाटी में अच्छा प्रदर्शन किया।
कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों की भी स्थिति कमजोर रही।
AIMIM और कुछ क्षेत्रीय दलों ने कुछ सीटों पर प्रभाव बनाया, लेकिन बड़े स्तर पर कोई चुनौती नहीं पेश कर सके। असम में हिंदू वोटों का बड़े पैमाने पर भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण और चाय बागान क्षेत्रों में ट्राइबल वोटों का समर्थन पार्टी के लिए निर्णायक साबित हुआ।
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि हिमंता सरमा की क्षेत्रीय नेतृत्व क्षमता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ने मिलकर भाजपा को मजबूत आधार प्रदान किया। सरमा ने चुनाव प्रचार के दौरान विकास, सुरक्षा और असमिया संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया, जिसने मतदाताओं को आकर्षित किया।
कांग्रेस की रणनीति फेल
कांग्रेस ने इस बार गौरव गोगोई को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा था, लेकिन पार्टी की पुरानी छवि, आंतरिक कलह और विकास के मुद्दों पर कमजोर पकड़ उसके पतन का कारण बनी। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बावजूद असम में कांग्रेस की जड़ें कमजोर पड़ गई हैं। कई कांग्रेस नेता चुनाव हारने के बाद पार्टी की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं।
भाजपा मुख्यालय में समर्थकों ने पटाखे फोड़े, नारे लगाए और मिठाइयां बांटी। हिमंता बिस्वा सरमा ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “ये जीत असम के विकास और स्थिरता की जीत है। हम सभी असमवासियों के हित में काम करेंगे।”
राज्यपाल ने जल्द ही नई सरकार बनाने के लिए हिमंता सरमा को आमंत्रित करने की संभावना जताई है। नई सरकार के गठन के साथ असम में अगले पांच वर्षों के लिए विकास की नई दिशा तय होने की उम्मीद है।
इस जीत के साथ भाजपा ने पूर्वोत्तर भारत में अपनी सियासी ताकत को और मजबूत कर लिया है। असम का यह परिणाम 2026 के बाद के अन्य राज्य चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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