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बापू की बेबसी! आंधी में उड़ी छत, सो गए झरिया के ‘माननीय’; कौन चुकाएगा गांधी का कर्ज।”

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May 4, 2026
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धनबाद: कोयलांचल का हृदय स्थल कहे जाने वाले झरिया का एकमात्र ‘चिल्ड्रन पार्क’ आजकल अपनी बदहाली और सत्ताधारियों की बेरुखी की दास्तां बयां कर रहा है। कभी पूर्व सांसद चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे के सौजन्य से यहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा धूमधाम से स्थापित की गई थी, ताकि बच्चे और बुजुर्ग बापू की छत्रछाया में मनोरंजन कर सकें। लेकिन अफ़सोस, आज बापू खुद एक सुरक्षित छत के लिए तरस रहे हैं। पिछले दिनों आई जोरदार आंधी और तूफान ने पार्क में स्थित गांधी जी के स्थल छत को क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रतिमा के ऊपर की छत टूटकर गिरी पड़ी है, लेकिन विडंबना देखिए कि ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्वच्छ भारत’ का नारा देने वाले माननीयों की नजर अभी तक यहाँ नहीं पड़ी।

अब सवाल उठता है कि ‘2 अक्टूबर’ वाले गांधी भक्त कहाँ हैं?स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि विधायक , सांसद, बड़े बड़े जनप्रतिनिधि नेतागण जो खुद को गांधीवादी बताते नहीं थकते इस मामले पर मौन साधे हुए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि जिस बापू ने देश को अंग्रेजों से मुक्ति दिलाने के लिए अपना घर-बार छोड़ दिया, क्या हम उनके स्मारक की एक छत ठीक नहीं करा सकते? यह वाकई शर्मनाक है कि जिस झरिया से करोड़ों का राजस्व निकलता है, वहाँ के एकमात्र पार्क में राष्ट्रपिता की प्रतिमा सुरक्षित नहीं है। अगर नेताजी सिर्फ चुनाव और जयंती पर ही गांधी जी को याद करेंगे, तो जनता का यह ‘सत्याग्रह’ निश्चित रूप से उनकी कुर्सी हिलाने का दम रखता है।


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